25 उ शहरके दवार दिनभर खुलल रथाँ। ओइने कबु नै बन्द हुइथाँ, काकरेकी वहाँ कबु रात नै हुई। 26 संसारके जाति-जातिनके मनै संसारके सक्कु खोब सुग्घुर-सुग्घुर चिजहे और अपन सम्पतिहे उ शहरमे नन्हीँ। 27 पर कुछु फेन अशुद्ध चिज उ शहरमे नै पैँठी। अश्लील काम करुइया या झूँट बोलुइया केऊ फेन वहाँ नै पैठिहीँ। वहाँ ओइने किल पैँठे सेक्थाँ, जेनके नाउँ पठ्वक जीवनके किताबमे लिखल बतिन। यी उ किताब हो, जेम्ने उ मनैनके नाउँ लिखल बतिन, जेनके थेन सदाकालके जीवन बतिन।
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