तेसर मोहर खोल्लक-अनिकाल पर्लक
5 जब पठ्वा तेसर मोहर खोलल, तब मै तेसर प्राणीहे असिके कहत सुन्नु, "आब जाऊ, आघे बह्रो।" तब मै देख्नु कि एकथो करिया घोरवा बाहेर आइल। और ओकरमे सवार रहुइयक हाँथेम एकथो तख्री बतिस। 6 उ चारथो जित्ती प्राणीनके बिच्चेमसे मै किहुहे असिके बोलत सुन्नु, जेकर आवाज एकथो मनैयक हस रहिस: "भविष्यमे पृथ्वीमे अनिकाल परी। तबेकमारे एक दिनके देहारीसे एक किलो चाउर, या तीन किलो जौ किल किनक लग पुगी। पर तेल और अंगुरके रस भर धेउर होजाई।"