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यशायाह 15

आब पतन

1 आब िषय भवियदी। िचय आब आर नगर एक ें उजऔर गयै; िचय आब नगर एक ें उजऔर गयै। 2 और ों पर िचढगए ैं; नबऔर दब15:2 दबा: यह यरदन नदें िगयदकिें एक नगर ा। ऊपर आब ! ! करतै। उन सभिुँ़े , और सभ़िाँ ुँ़ी ैं; 3 सडों ें पहनैं; छतों पर और ों ें सब बह! ! करतैं। 4 शबऔर एलिरहैं, उनकशबयहस तक पडै; इस रण आब हथिर-बनिरहैं; उसकअति उदै। 5 मन आब ि15:5 मन आब िै: यह गहन अनयककरतै, और रमि भवियदवकसमझ ें उस पर आनआपदें िपतिोंी।; उसकरईस अर और एगलत-शलितक ैं। ो, चढ़ापर चढरहैं; ो, ें िहट मचरहैं। 6 िजल गया; हलगई और हरिगई, और नमनहीं रही। 7 इसलिधन उनोंबचरखा, और उनोंइकटिै, उस सब उस िरहैं िसमें मजनैं। 8 इस रण आब ों ओर ें िहट रहै, उसमें एगलऔर ें पडै। 9 ोंि लहभरै; ैं पर और ुःूँा, ैं बचआबिों और उनकििंूँा।

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