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यशायाह 18

िषण

1 , ों फडफड़ाहट भर, नदिों परै; 2 और समपर ों सरकणों ों ें कर जल यह कह जतै, ों, उस ि िसकबलिऔर दर ैं, आदि अब तक डरवनैं, पनऔर ौंदनैं, और िनकनदिों िििै।

3 जगत सब रहनों, और सब ििों, जब झणपह़ों पर खड़ा ि, उसो! जब नरसिंूँ, तब ो! 4 ोंि यहझसयह कहै, "गरकटनसमय ओसवदल समैं कर िूँ18:4 ैं कर िूँा: ैं हसतकनहीं करूँा। ैं रहूँा। उनकिनहीं करूँा। ऐसएविछल रहूँउनकजनपकषधर ूँ। " 5 ोंि समय पहलजब ें, और पकनलगें, तब वह टहनिों ा, और िों ़-कर अलग ेंा। 6 पह़ों ाँपकिों और वन-पशिइकटपड़े रहेंे। और ाँपकउनकचते-चतपकिे, और सब ाँि वन पशउनके-सरेंे।

7 उस समय िि बलिऔर दर ैं, और आदि डरवनआए ैं, और मरऔर ौंदनैं, और िनकनदिों िििै, उस ि यहिपरवत पर यहेंपहुँएगी।

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