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यशायाह 39

िजकिखत

1 उस समय बलदमरदक बलद, ा, उसनिजकिऔर िचरनकर उसकपतऔर ेंी। 2 इनसिजकिरसनकर अपनअनमपदों भणऔर ाँी, ा, गनध-दरव, उततम और अपनअनमपदों भणों ें ो-वसी, सब उनकिखलिजकिभवन और भर ें ऐसवसनहीं रह गई उसनउनें िो। 3 तब यशनबिजकिकर ा, "मनकह गए, और कहाँ आए े?" िजकिकहा, "अरआए े।" 4 िउसना, "भवन ें उनोंा-39:4 भवन ें उनोंा-ा: यह अति समभव ि िजकिउनें अपनखजियरशलें सरववििा। ऐसतथवजनिकरषक रण सकतऔर मनों रण उतपनकर सकतै। ै?" िजकिकहा, "भवन ें ै, वह सब उनोंै; भणों ें ऐसवसनहीं ैंउनें िो।"

5 तब यशिजकिकहा, "यहयह वचन े: 6 ऐसिआनैं, िनमें भवन ें और आज ितक रखरखभणों ें ैं, वह सब उठ एगा; यहयह कहति वसबची। 7 ें उतपनों, उनमें कई ें े; और बनकर जभवन ें रहेंे।" 8 िजकियशकहा, "यहवचन कहवह भलै।" िउसनकहा, "िों ें ि और सचबनरही।"

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