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यशायाह 16

आब िजनक िि

1 गल ओर नगर िपरवत पर िि़ों बचों ो। 2 आब िाँ अरपर उज़े ोंसलपकऔर उनकभटकबचों समैं। 3 सममति16:3 सम्मति: अर्थात् वह करो जो न्याय संगत एवं उचित हो। करो, ; पहर ें अपनसमकरो; घर ििरखो, े-िरतैं उनकमत पकड4 िैं ें रहें; करनआब बचसननहीं रहा, िी; ोंि ें करनगए ैं। 5 तब दयएक िंसन ििएगऔर उस पर ऊद तमें सचएक िजमिकर सचकरऔर िकतपर ततपर रहा।

6 हमनआब गरिषय ि वह अतयनअभिा; उसकअभिऔर गरऔर समें ै—परनउसकबड़ा यरै। 7 ोंि आब ! ! करा; सब सब आब िकरेंे। रहरसत ििों िअति िकर लमी-लमाँिकरेंे।

8 ोंि शबऔर िबमखलतगईं; ि-ि अधििों उनकउततम-उततम लतट-कटकर ििै, तक पहुँऔर गल ें लतगईं; और बढे-बढतक बढगई ीं। 9 ैं िबमखलति16:9 ा: उज़ा ऐसभयनक ि ैं भवियदवकिकरूँा, यदयपि वह नहीं, सरै।; शबऔर एले, ैं ें अपनींूँा; ोंि पकफलों और अनकटनसमय ललकपड़ी ै। 10 फलदिों ें आननऔर मगनतरही; िों ें एगा, हरशबा; और खरस ों ें ौंा, ोंि ैं उनकहरशबबनकरूँा। 11 इसलिमन आब रण और दय रहरण रनदन करतै।

12 और जब आब पर ुँिे-िथक , और थनकरनअपनपविरसें आए, उसा। 13 यहवह यहइससपहलआब िषय ें कही। 14 परनअब यहयह कह16:14 अब यहयह कहै: यह यशिएवििभवियददरें ि उनकिवरें ा। , "मजदों वरों समवरतर आब भव और उसक़-सब ठहरी; और ़े बचेंउनकबल ा।"

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