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यशायाह 40

28 नहीं नते? नहीं ा? यहसनतन परमवर और भर जनहै, वह थकता, रमिै, उसकि अगम ै। 29 वह थकबल और शकिबहमरै। 30 तरथकतऔर रमिैं, और जवकर कर िरतैं; 31 परनयहहतैं, नयबल करते, उकों समउड़ेंे, ़ेंऔर रमिोंे, चलेंऔर थकिोंे।

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