बहुतायत के जीवन के लिए एक निमंत्रण
1 "अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपये और बिना दाम55:1 बिन रुपये और बिना दाम: ऐसा कोई भी गरीब नहीं होगा कि खरीद न सके, और कोई ऐसा धनवान भी नहीं होगा कि सोने से खरीदे। अगर गरीब या उसे धनवान प्राप्त करे तो वह बिना पैसे या मोल लिए होगा। ही आकर ले लो। (यूह. 7:37, प्रका. 21:6, प्रका. 22:17) 2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और जिससे पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएँ खाने पाओगे और चिकनी-चिकनी वस्तुएँ खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
6 "जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है55:6 जब तक वह निकट है: इसका महत्त्वपूर्ण अर्थ है कि परमेश्वर हर समय हमारे निकट ही रहता है और दर्शाता है कि कुछ समय अन्य समय की तुलना में ऐसे होते हैं जब उसको खोजना अधिक अनुकूल परिस्थिति में हो जाता है। तब तक उसे पुकारो; (प्रेरि. 17:27) 7 दुष्ट अपनी चाल चलन और अनर्थकारी अपने सोच-विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।