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यशायाह 55

बहयत वन िएक िरण

1 "अहसब ों, आओ; और िनकपयो, आकर और ! खमधऔर िपयऔर ि55:1 िपयऔर ि: ऐसगरनहीं ि खरसके, और ऐसधनवनहीं ि खरे। अगर गरउसधनवकरवह ििा। आकर ो। (. 7:37, रका. 21:6, रका. 22:17) 2 जनवसनहीं ै, उसकिों पयलगो, और िससनहीं भरतउसकिों परिरम करतो? ओर मन लगकर ो, तब उततम वसओगऔर िकनी-िकनवसकर सनओगे। 3 लग, और आओ; ो, तब िरहे; और ैं सदाँूँा, अरऊद पर अटल करा। (भज. 89:28, ि. 4:20, ि. 13:34) 4 ो, ैंउसकय-रों िऔर रधऔर आजठहरै। (इबा. 2:10, इबा. 5:9, रका. 1:5) 5 , ऐसि िनहीं नतएगा, और ऐसिाँ नहीं नत़ी आएी, परमवर यहऔर इसएल पवििियह करेंी, ोंि उसनयमिै।

6 "जब तक यहिसकततब तक उसकें रहो, जब तक वह िकट 55:6 जब तक वह िकट ै: इसकमहतवपअरि परमवर हर समय हमिकट रहतऔर दरि समय अनसमय लनें ऐसैं जब उसकजनअधिअनपरििि ें ै। तब तक उसो; (ि. 17:27)

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