12 याहवेह ही हैं जिन्होंने अपने सामर्थ्य से पृथ्वी की सृष्टि की;
जिन्होंने विश्व को अपनी बुद्धि द्वारा प्रतिष्ठित किया है,
अपनी सूझ-बूझ से उन्होंने आकाश को विस्तीर्ण कर दिया.
12 याहवेह ही हैं जिन्होंने अपने सामर्थ्य से पृथ्वी की सृष्टि की;
जिन्होंने विश्व को अपनी बुद्धि द्वारा प्रतिष्ठित किया है,
अपनी सूझ-बूझ से उन्होंने आकाश को विस्तीर्ण कर दिया.