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येरेमियाह 47

ििििनबवत

1 इसकि अजपरिकरता, भवियदवकििििों ियह ्‍:

2 यह हवै:

"यह खनि उततर जल तर लगा;

और यह बढकर रचरवें परिवरिएगा.

यह ि आचिकर वह सब ि ऊपर ै,

नगर तथनगरविों ी.

िेंे;

तथहर एक ििकरा.

3 ़ों ों वनि रण,

उसकरथों आवनकर,

उनकपहिों गडगड़ाहट रण.

िकर अपनलकों ेंे;

ोंि उनकैं.

4 यह इसलिि िििों ि

तथऔर ें

हर एक रह गए सहयक

नषकरनिआयै.

वयहविििों तथतटवर

ों बचों नषकरनिैं.

5 अजिुंपड़ा ै;

अशकलनषिै.

उनकबचो,

कब तक अपनयल करतरहे?

6 " आह, हवतलव,

और कब तक रतांी?

अब अपनें ो;

िकरऔर पचरहो.’

7 यह ांरह सकत

जब इसआदहविै,

उसअशकलतथसमरतट

ों िियत िगयै?"

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