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येरेमियाह 4

1 हवयह ै,

"इसएल, यदि ो, आनउपया,

यदि पद वससमककर

और यदि अपनकलिचलिो,

2 और िें, यपणतें तथवजों ें यह शपथ ो,

िहवशपथ,

तब जनतवयहवआशि

तथहवें उनकरव एगा."

3 यहिएवशलििों िहवआदै:

"उस ि पर हल चलो,

ि ें पण करो.

4 यहितथशलिो,

हविअपनतनकरो,

तनअपनदय करो,

अनयथअगि-समभडउठऔर यह ऐसी,

िअलग करनििभव ा—

ोंि यह करों परिै.

उततर िआनआपति

5 "यहिें रचकरऔर शलें यह कहो:

ें नरसिंकरो!’

उचवर ें यह कह:

सब एकतों!

तथहम सब गढनगरों ें शरण ें!’

6 ़िओर ि!

पचखड़े रहो, आशरय करो!

ोंि ैं उततर िमहकट रहूं,

यह िा."

7 ़िों ें ििंहर िकल आयै;

ों िशक रसिै.

वह अपनआवहर

ि वह िजन बने.

नगर डहर रह

उनमें िरह एगा.

8 तब रण वसरण करो,

और िकरो,

ोंि हवरचहमस

नहीं हटै.

9 "उस िऐसा," यह हवै,

"तथउचिहस एगा,

तब िभयभएवं,

भवियदवकअचिरह े."

10 इस पर ैं कह उठा, "रभहव! आपनशलििों यह आशसन णतें रखै, ांएवरकिरहे,’ जबकि उनकगरदन पर तलवरखै!"

11,12 उस समय इस रजएवशलकहएगा, "मरि वनसपतिइयों आदपर एक रबल उषरवउठा, उसकलकरजी; यह नसतथसम्‍ि िनहीं ै. अब ैं उनकिय-दिकरूंा."

13 ो! वह मडों सदबढ़ा चलरहै,

उसकरथ बवडर सदैं,

उसक़े गऱों अधितगैं.

िहम पर! हम िगए ै!

14 शल, अपनदय कर करो, ि रकिरह सको.

और कब तक ममें िों िरहा?

15 एक वर कह रहै,

एफईम परवत रचिरहै.

16 "इससमय ों ें चनरसि,

शलें इसकरचि:

नगर करेंरहैं,

यहिनगरों िअपनवर उठे.

17 रहरिों सदअपनकरतरहैं,

यह इसलिि उसनिििै,’ "

यह हवै.

18 "आचरण एवों

रण यह िि आई ै.

यह कट.

ितनकडा!

इसनदय िै!"

19 , !

ैं अक़ा ें ूं.

आह दय! दर ें दय धडरहै,

ैं ांनहीं रह सकता.

ोंि , ैंनरसिं,

ललक, ै.

20 िपर िगई ै;

ोंि उधवसिै.

अचनक वसगए ैं,

परषण ें नषगए ैं.

21 ैं कब तक ा-पतखतरहूं

और कब तक नरसिंों ें पडरहा?

22 "ोंि िि रजा;

वह नहीं नती.

लक ैं;

उनमें समझ अभै.

अधरिउनमें ि अवशै;

िंसतकरउनसिनहीं ै."

23 ैंपर ि ी,

और ि वह आकरहितथिी;

ैंआकओर ि उठऔर ैंा,

ि वहां ि-ा.

24 ैंपरवतों ओर ि ी,

और ि ांरहे;

और पह़िां इधर-उधर सरक रही.

25 ैंिा, ि वहां मननहीं ा;

तथआकपकपलयन कर े.

26 ैंा, और यह ि फलदअब िजन रदा;

तथइस नगर हव

तथउनकउगसमकवसे.

27 यह हवै:

"िजन एगा,

िैं इसकिकरूंा.

28 इसकििकर

तथऊपर आकपडएगा,

इसलिि ैं यह कह ूं और ैं ििकर ूं,

ैं अपनिपरिवरिकरूंऔर ैं हटूंा."

29 सवएवधनिों वनि हर एक

नगर गनलगतै.

़िों ें िपतैं;

चटों पर चढैं.

सभनगर ़े ैं;

उनमें िनहीं कर रहा.

30 और िजन ो, अब करी?

यदयपि भडवसरण िो,

यदयपि मनवयवरआभषणों सजििै?

यदयपि मनअपनों ृंकर उनें सजै?

वयऐसरमवरयरै.

िों िअब िगई ो;

अब ों ैं.

31 ऐसकरहट रसकरहट ऐसदनवर,

उस िसकपहलरसव रहो.

यह ़ििहट िसकांरहै,

वह अपनकर कह रहै,

"! िपर;

हतों समकरहै."

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