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येरेमियाह 2

यहििसघ

1 तब हवयह ्‍: 2 ", शलरजों ें करो:

"यह हवै:

" िषय ें मरण ै: जविा,

ि

और िजन रदें अनसरण,

ऐसें, जहां नहीं ा.

3 इसएल हविपवििा,

हवपहलउपज;

ििइस उपज उपभिा,

गए; कट रसिगए,’ "

यह हवै.

4 शजों, हवो, इसएल ों,

ी.

5 हवयह ै:

"वजों झमें अना,

ि झसगए?

िकमवसकर

वयिकमबन गए.

6 उनोंयह रशिा, कहां ैं हव,

िोंहमें िि

और हमें िजन रदें कर यहां ा. मरि

तथगडों ि ें े,

उस ि ें े, जहां िजल तथधक्‍ा,

उस ि ें िसकनहीं गया, िसमें िनहीं करता?’

7 ैं ें उपजि पर आय

ि इसकउपज वन करऔर इसकउततम वसउपयकरो.

िंमनआकर ि अशकर ि

और मनइस िपद बनिा.

8 िों यह समझनरयकभनहीं िा,

हवकहां ैं?’

आचनते;

उचअधििें ििा.

भवियवकभवियवी,

तथउस उपकरम ें लग गए िररथक ै.

9 "तब ैं समकअपनसहयक रसकरूंा,"

यह हवै.

"ैं समकअपनसहयक रसकरूंा.

10 गर कर िितटवरों ें ो,

िजकर अवलकन करो;

और करि कभऐसै:

11 िअपनवतपरिवरििैं?

(जबकि वतनहीं करते.)

िंरजअपनरव ििमय उससकर ि

सरवथिररथक ै.

12 आक, इस पर अपनभय अभियककरो,

ांऔर अतनस,"

यह हवै.

13 "रजइयां ैं:

उनोंवन

परिकर िै,

उनोंऐसबनिैं,

ैं, नहीं सकते.

14 इसएल ै, अथवघर ें जनवक?

तब उसकिों िरहै?

15 जविंउस पर दहरहैं;

अतसशकरहउनकदह़.

उनोंउसकउजबनिै;

उसकनगरों नषकर िऔर उसकनगर िजन रह गए ैं.

16 मफितथहपनहों

उपज ें ैं.

17 यह वयिि नहीं ै,

जब हवें कर रहे,

मनहवअपनपरमवर परिकर िा?

18 िंअब िओर ों खतो?

नदजल लकै?

अथवअशपर कर रहो?

लकै, फरनदजल वन करना?

19 अपनें ी;

हवरति रदभटक ें रत़िकरा.

तब यह समझ

तथयह पहच

हवअपनपरमवर परिकरनिकर एव़ाै,

ममें रति भय-भनहीं,"

यह रभपरमवर ै.

20 "वरों ैंकर ि

तथधन े;

िंमनकह िा, ैं नहीं करूंा!’

ोंि, हर एक उचपरवत पर

और हर एक हर

मना-सदिसघिै.

21 िैंें एक उतषलतसद, णतः,

िसदििा.

तब ऐसगयिगए

और वनलतिें, परिवरिगए?

22 यदयपि वयवचकरत

तथभरपरयकरतो,

िअधरसमकबनै,"

यह रभहवै.

23 "यह कर सकतो, ैं अशनहीं ूं;

ैं वतरति िनहीं ूं’?

उस ें अपनआचर-वयवहमरण करो;

यह पहचि कर ो.

उस टनसदिलक

ओर गति उततरतर उलझतरहै,

24 वनों ें पली-बढ़ी उस वनगधसदो,

अपनलसें रहतै—

उतजनसमय ें उसििकर सकतै?

सब उसजतैं यरों;

उसकउस समगम ऋतें उसेंे.

25 ांे-िरहें

और गलखन.

िंमनकहा, िररथक यह रय! नहीं!

ैंअपरििों िै,

ैं उनीं ी.’

26 "पकड़े पर लजिै,

इसएल शज लजिैं—

े, उनका, उनकउचअधिी,

उनकिऔर उनकभवियदवका.

27 कहतैं, िो,’

तथपतथर े, मनजनिै.’

यह इसलिि उनोंअपनओर कर

अपननहीं;

िंअपनकट समय, कहेंे,

उठिऔर हमरकि!

28 िंवतमनअपनििििैं, कहां ैं?

यदि उनमें रककरनषमत

कट समय ं!

ोंि यहिा, ितननगरों

उतनैं वता.

29 "झसद-विों कर रहो?

सभिबलविै,"

यह हवै.

30 "यरा;

उनोंइसनहीं िा.

िंसक िंसद

तलवभवियवकिगल कर गई.

31 "इस ़ी ो, हववचन पर ो:

"इसएल िैं िजन रदसदरहूं

अथवगहन धकसद?

रण ि रजयह कहतै, हम करनिवतैं;

आवशयकति हम आपकशरण ें आएं’?

32 नवयवतअपनआभषणों उपकर सकतै,

अथविवधिउसकृंमहतवहै?

िरजलनपसकर िै,

वह े.

33 अपनिबरतन तक पहुंचनिशलतवक ि कर ो!

तब मनिों अपनिां िैं.

34 वसपर

िगरवन रकगयै,

ें पतचलि कब आवें आए.

35 यह सब पर मनिा, ैं िसहूं;

िचय उनकपर टल ै.’

िंयह समझ ि ैं कर रहूं

ोंि मनिै, ैं िसहूं.’

36 अपनिां परिवरिों करतरहतो,

यह मरण रखना?

िरकअशसमकलजि

उसरकें िसमकलजिपड़ेा.

37 इस ें िा.

उस समय िपर ोंे,

ोंि िपर भरउनें हवअसकर िै;

उनकसमि भव नहीं ै.

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