18 ज़ांऊं शमौनै भाल़अ कि शधाणूंए हाथा लाणैं करै एछा पबित्र आत्मां, तेऊ तिन्नां सेटा ढब्बै आणी बोलअ, 19 "ऐहा शगती दैआ तम्हैं मुल्है बी ताकि ज़हा प्रैंदै हुंह हाथ डाहूं, तेऊ लोल़ी पबित्र आत्मां भेटी।"
20 पतरासै बोलअ तेऊ लै इहअ, "तेरै ढब्बै लोल़ी ताह संघै बरैबाद हुऐ किल्हैकि तंऐं किअ परमेशरो दान ढब्बै करै मोल लणेंओ बच़ार! 21 ऐहा च़ाकरी दी निं तेरअ हेस्सअ आथी अर नां किज़ै बांड, किल्हैकि तेरै मन्नैं निं परमेशरा सम्हनै सुंबल़ी सोर आथी।8:21 भज. 78:37 22 आपणैं पापो प्राश्त करा, अर बूरी गल्ला सोठणें पाआ छ़ाड़। प्रभू का कर प्राथणां ताकि सह तम्हां माफ करे। झ़ाणीं सह थारी बूरी सोठा लै तम्हां माफ करी हेरे। 23 बूराईए बाता का हआ दूर, थारै मन्नैं आसा हाम्हां लै कल़बिश भरी दी। तम्हैं आसा सदा बूरै करदै रहणैं आल़ी सोठे बशै हुऐ दै! तम्हैं निं परमेशरे सज़ा का बच़ी सकदै।"8:23 बधा. 29:18; लाम. 3:15
24 शमौनै दैनअ ज़बाब, "तम्हैं करा मुल्है प्रभू का प्राथणां कि ज़ुंण गल्ला तम्हैं बोली, तिन्नां मांझ़ै निं कोहै लोल़ी मुल्है हुई-बिति।"