10 "ज़ुंण मुंह मणछे पूतो बरोधी हई किज़ै बोले, तेऊओ ज़ुल्म सका हई माफ, पर ज़ुंण पबित्र आत्में निंदा करे तेऊए ज़ुल्म निं कधि माफ हणैं।
10 "ज़ुंण मुंह मणछे पूतो बरोधी हई किज़ै बोले, तेऊओ ज़ुल्म सका हई माफ, पर ज़ुंण पबित्र आत्में निंदा करे तेऊए ज़ुल्म निं कधि माफ हणैं।