6 अळी आसम हयु के चाळीह दाड़ा नी अळतेण नुह आह़फा बणावला मोट्लु ढुन्ड्यु नी खीड़की खोलीन, 7 एक ढान्ड्यो उडाड़ देदो: जत्यार तक पाणी धरती पोर सी सुख नी ज्यु, तां तक ढांड्या जींखर-तींखर फीरतु र्यु। 8 अळी तीहयु आह़फी पां गेथु एक पारवी ने बी उडाड़ देदो के देखे के पाणी धरती पोर गेथु कम हयु के नी। 9 तीहयी पारवी ने आह़फा पोगु टेकवा जुगु कोय जागो नी जड़्यो, ता तीहयी तीनी पां मोट्लु ढुंड्यु मे पासी आवती री: काहाके आखी धरती नी उपर पाणीत-पाणी फीरलु हतु तत्यार तीहयो हात बड़ावीन तीने आह़फान्तां ढुंड्या मे ली लेदो। 10 तत्यार अळी ह़ात दाड़ा तक वाट जोवीन, तीहयो तीहयी पारवी ने मोट्लु ढुंड्यु मे सी अळी उडाड़ देदो। 11 अने पारवी ह़ांती टेमे तीनी पांह आवती री, ता ह़ु देख्यो के तीना चोण मे जेतुन झाड़ नु एक नवलु पान्टु से; आनी सी नुह जाण लेदो, के पाणी धरती पोर कम हय जेलु से। 12 अळी तीहयो ह़ात दाड़ा अळी वाट जोवीन तीहयी पारवी ने उडाड़ देदो; अने तीहयी तीनी पांह कदी पाछी नी आवी।
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