8 ऐना चारो जीवधारी मा लक हरेक को सह-सह पंख होतीन। उनको चारो कना, अना भीतर डोराच डोरा होतीन। दिवस अना राती बिना रुकयो यो गावत होतिन।
"पवीतर पिरभु परमेस्वर सब लक ताकत वर से,
जो होतो, अना जो से अना जोन आवनवालो से।"
8 ऐना चारो जीवधारी मा लक हरेक को सह-सह पंख होतीन। उनको चारो कना, अना भीतर डोराच डोरा होतीन। दिवस अना राती बिना रुकयो यो गावत होतिन।
"पवीतर पिरभु परमेस्वर सब लक ताकत वर से,
जो होतो, अना जो से अना जोन आवनवालो से।"