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1 Reis 8

मनदर रति

1 इसएलां ीं अर ां णसां ीं इसएलिाँ वजां घर्‍रधे, यरशलअपणइस इरकठकरे, यहकरसनऊदपििउपपर आवैं। 2 आखर इसएलणस एततवें महि्‍बखत कठ 3 िइसएलअगआए, जकां सनीं िा। 4 अर यहसन, अर िपआळतमू, अर ितनपविबरतन उस तमे, उन रयीं जक अर णस उपपर े। 5 अर अर इसएलमणडळी, उसककठी, सनइतणअर बळध बलि करण गरे, िनकिणतितरिां सकी। 6 जकां यहसनउसकजगहां िभवन पविरस्‍, परमपविै, हचकरां ां तळधर िा। 7 करसनजगहां उपपर इसे, उपपर सनअर उसकडणाँ ीं ाँे। 8 डणइतणे, उनकिउस पविरस्‍पविरस्‍िपड़ै पर हर िैं े। आज िीं उरैं। 9 सनिा, उन पटिाँ पह उसकितर उस बखत धरी, ियहइसएलिाँ ििकडउनककरकरया। 10 िजक पविरस्‍िकड़े, यहभवन घणदळ गया। 11 अर दळ ां रण जक ा-करण तर खड़े रह सके, ूँयहयहभवन भरगा।

12 िनतकरण ा, "यहकहा, अनधककररहूँा। 13 सचममन्‍तर एक रहण जगहां, बलकइसबणै, िबणरहवै।" 14 इसएल सभऔर ुँरकउन ीं आशिा; अर सभखड़ी रही। 15 अर उसनकहा, "धनइसएल परमसवर यहा! िसनअपणुँिऊद ीं वचन िा, अर अपणउस ीं करयै, 16 ििअपणरजइसएल ीं ििा, िमन्‍िइसएलनगर ा, िितर भवन बणै; पर मन्‍ऊद ीं िा, रजइसएल हकदो।’ 17 इब िऊद इचइसएल परमसवर यहएक भवन बणै। 18 पर यहिऊद कहा, इचै, यहएक भवन बणै, इसइचकरकतन्‍भलकरया; 19 उस भवन ीं बणा; अपणा, भवन बणा।’ 20 वचन यहकहा, उस ीं उसनकरयै, अर अपणिऊद जगहां उठकै, यहवचन िइसएल गदिजमूं, अर इसएल परमसवर यहइस भवन ीं बणै। 21 अर इस मन्‍एक जगहां उस सनतर हरै, ियहकरै, उसनरखां ीं ििबखत उनतकरया।" 22 इसएल सभखदयहखडा, अर अपणऔर कहा, यहा! 23 इसएल परमसवर! बरबर उपपर , अर तळधरतपरमसवर ै: अपणमन अपणीं समणक्‍ैं, उनकतर अपणकरकरै, अर करकरदरहवै। 24 वचन तन्‍िऊद ीं िा, उसकतन्‍लन करयै, ितन्‍अपणुँकहा, उसअपणउस ीं करयै, िआज ै। 25 इस करकइब इसएल परमसवर यहा! इस वचन कर, तन्‍अपणिऊद ीं िा, ", इसएल गदिजण आळसदबणरहवें इतणिमन्‍णकलदरहा, उसतरिां णस अपणचलण इसकसकरैं।" 26 इस करकइब इसएल परमसवर अपणवचन तन्‍अपणिऊद ीं िउसनसच्‍िकर

27 "परमसवर सचमधरतकरा, बलकसबत्‍समा, बणइस भवन ितरिां समा। 28 परमसवर यहा! अपणथनअर िि़ाऔर लगै, ि्‍हट अर थन! आज कर रहूं; 29 इस भवन और िइस जगहां और िसकतन्‍कहै, ओड़ै रहवा,’ त-दिरहवैं अर थनइस जगहां और करै, उसने। 30 अर अपण, अर अपणरजइसएल थनिीं इस जगहां और िि़ाकरैं उसनिे, बलिस-सिे, अर णककरिे।"

31 "ििसरअपरकरै, अर उस ीं कसम आई ै, अर आकइस भवन कसम ै, 32 णकै, िअपणां करकठहरअर उसकउसिहड़ा े, अर ििठहरै, उसकिकतिउसनफळ िे। 33 िरजइसएल िकरण रण अपणिाँ ै, अर और अर इस भवन िि़ाथनकरैं, 34 णकअपणरजइसएल करिे: अर उननइस हड़ा आईये, तन्‍उनकरखां िा।"

35 "ििकरैं, अर इस रण अकबन, िै, इसबखत इस जगहां और थनकरक्‍िउननै, अर अपणिैं, णककरिे, 36 अर अपणां, अपणरजइसएल करिे; उननभलिै, िसपउननलणिे, ांअपणइस ै, तन्‍अपणरजकर िै, बरसिे।"

37 "िइस मरलस ििाँ ़े उनकमन उनकटकां उननैं, ििपति ूँ ों, 38 णस रजइसएल अपणे-अपणमन ें, अर िि़ाहट थनकरकअपणइस भवन और ै; 39 अपणिस-सणककरिे, अर इसकरिे, एक-एक मन णकउसकिउननफळ िे: णसां मन ां णण आळै। 40 ितनिइस रहवैं, तन्‍उनकरखां िा, उतनिीं भय रहवैं।"

41 "परदरजइसएल ो, िणकै, आवैं, 42 बड़े अर बलवनअर बड़ाखबर ैं; ांिइसआकइस भवन और थनकरैं, 43 अपणिस-स, अर ितर इसपरदतन्‍ै, उसिबरतकरििसतधरतां णस णकरजइसएल बरबर भय ्‍ै, अर जरै, भवन िीं मन्‍बणै, हवै।"

44 "िरजणस ििउननै, ओड़ै अपणिाँ लड़ाकरण िकडैं, अर इस नगर और िीं तन्‍ै, अर इस भवन और िीं मन्‍बणै, यहथनकरैं, 45 उनकथनअर िि़ाहट णकउनककरिे।"

46 "इसणस िसनकदकरयो: िकरैं, अर उनपकरकउननमनां कर े, अर उननबनबणअपणो, ै, ैं, 47 अर िकरैं, अर अपणबनबणआळयां तन्‍िि़ाकहवै, हमनकरया, अर िलतअर टतकरै;’ 48 अर अपणउन मनां उननबनकरकों, अपणमन अर और ़ै अर अपणइस और तन्‍उनकरखां िा, अर इस नगर और िीं तन्‍ै, अर इस भवन और िीं मन्‍बणै, आगथनकरैं, 49 अपणिस-सउनकथनअर िि़ाहट िे; अर उनककरिे, 50 अर रजणस िकरैंे, अर ितनअपरिकरैंे, रयकरकै, उनकबनकरण आळयां मन इसदयकरिउनपदयकरैं। 51 ूँरजअर ििैं िननभटििििै। 52 ांिि़ाहट अर रजइसएल िि़ाहट ओर इसरहवैं, िब-जितनै, जद-जद उनकै; 53 ूँरभयहअपणउस वचन ि, तनरखां ीं ििबखत अपणजरििा, तनइन णसां ीं अपणिितर धरतां करयै।" 54 ियहथनिि़ाहट कर ा, टन्‍अर अकऔर ा, यहउठा, 55 अर खडो, इसएलसभीं ्‍वर कहकआशिा, 56 "धनयहा, िसनअपणकहिअपणरजइसएल ीं आरिै, ितनभलउसनअपणजरिकही, उन एक िरही। 57 परमसवर यहितरिां रखां रहवा, उसतरिां रहवै, हमनअर हमने। 58 मन अपणऔर इसिै, हम उसककरां, अर उसककम अर िि अर ियम िनतउसनरखां िे, करां। 59 अर िनकमन्‍यहिनतकरै, िअर परमसवर यहमन बणरहवैं, अर िजररत उसतरिां अपणअर अपणरजइसएल करयकरै, 60 अर इसतधरतें, यहपरमसवर ै; और सरी। 61 मन परमसवर यहऔर इसतरिां रहवैं, आज तरिां उसकििाँ अर उसककम रहो।" 62 इसएल समयहलबलि चढ़ाा। 63 अर पशलबलि यहचढ़ा, ईस हजबळध अर एक हजी। इस तरिां इसएलिाँ समयहभवन रतिकरी। 64 उस ियहभवन आळगण िएक पविकरयअर मबलि, अर अन्‍नबलि अर लबलिां चरओड़ै चढ़ा; ूँतळ यही, उनकतर ी। 65 आखर अर उसकइसएल एक बड़ी सभहमरवश-दिीं ां कठी, सपीं िितक परमसवर यहमना। 66 आठवें िउसनरजणसां ीं िकरया। अर ीं धन, धन, कहकउस भलरण यहअपणऊद अर अपणरजइसएल करी, आननिअर मगन अपणे-अपणचलगए

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