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1 शमूएल 1:6-8,10,13,15,18

6 पर उसकी सौत इस कारण तै, के यहोवा नै उसकी कोख बन्द कर राक्खी थी, उस ताहीं भोत घणा चिढ़ाकै कुढ़ाती रहया करदी। 7 हन्‍ना तो हर साल न्यूए करया करै थी; अर जिब हन्‍ना यहोवा के भवन म्ह जान्दी तो पनिन्‍ना उस ताहीं चिढावै थी। ज्यांतै वा रोन्दी रहन्दी अर खाणा न्ही खावै थी।

हन्‍ना की शपथ

8 फेर उसके पति एल्काना नै उसतै कह्या, "हे हन्‍ना, तू क्यांतै रोवै सै? अर खाणा क्यूँ न्ही खान्दी? अर तेरा मन क्यूँ उदास सै? के तेरे खात्तर मै दस बेट्यां तै भी बढ़कै न्ही सूं?" 10 वो मन म्ह दुखी होकै यहोवा तै प्रार्थना करण अर बिलख-बिलख कै रोण लाग्गी।

13 हन्‍ना मन ए मन कहण लागरी थी; उसके होठ तो हाल्‍लै थे पर उसकी आवाज कोनी सुणै थी; ज्यांतै एली नै समझया के वा नशे म्ह सै। 15 हन्‍ना नै जवाब दिया, "न्ही, हे मेरे स्वामी, मै तो दुखियाँ सूं; मन्‍नै ना तो दाखमधु पिया सै अर ना मदिरा, मन्‍नै अपणे मन की बात खोलकै यहोवा तै कही सै। 18 उसनै कह्या, "तेरी दास्सी तेरी नजरां म्ह दया पावै।" फेर वा जनान्‍नी चली गई अर खाणा खाया, अर उसका मुँह फेर उदास न्ही रहया।

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