1 शमूएल नै शाऊल तै कह्या, "यहोवा नै अपणी प्रजा इस्राएल पै राज करण खात्तर तेरा अभिषेक करण खात्तर मेरे ताहीं भेज्या था; इस कारण इब यहोवा की बात सुण ले। 2 सेनाओं का यहोवा न्यू कहवै सै, ‘मन्नै याद आवै सै के अमालेकियाँ) अमालेकियाँ नै सीनै जंगळ म्ह रपीदीम म्ह इस्राएलियाँ पै हमला करया था (निर्ग. 17:8-13; व्यव. 25:17-19)। नै इस्राएलियाँ तै के करया; जिब इस्राएली मिस्र तै आण लागरे थे, तब उननै रास्ता म्ह उनका सामना करया। 3 इस कारण इब तू जाकै अमालेकियाँ नै मार, अर जो किमे उनका सै उसनै बिना दया करे सत्यानाश कर; के माणस, जनान्नी, बच्चा, चाहे दूध पीन्दा हो, गां-बळध, भेड़-बकरी, ऊँट, गधा, सारया नै मार दिये।’"
4 फेर शाऊल नै माणसां ताहीं बुलाकै कठ्ठा करया, अर उननै तलाईम म्ह गिण्या, अर वे दो लाख प्यादे, अर दस हजार यहूदी माणस थे। 5 फेर शाऊल नै अमालेक नगर कै धोरै जाकै एक घाटी म्ह घातकां ताहीं बैठाया। 6 अर शाऊल नै केनियाँ तै कह्या, "ओड़ै तै हटो, अमालेकियाँ के बीच म्ह तै लिकड़ जाओ कदे इसा न हो की मै उनकै गैल थारा भी अन्त कर डालूँ; क्यूँके थमनै सारे इस्राएलियाँ पै उनके मिस्र तै आन्दे बखत प्रीति दिखाई थी।" अर केनी अमालेकियाँ के बीच म्ह तै लिकड़ गए। 7 फेर शाऊल नै हवीला तै लेकै शूर परदेस ताहीं जो मिस्र के पूर्व म्ह सै अमालेकियाँ ताहीं मारया। 8 अर उनके राजा अगाग ताहीं जिन्दा पकड्या, अर उसकी सारी प्रजा ताहीं तलवार तै नाश कर दिया। 9 पर अगाग पै, अर आच्छी तै आच्छी भेड़-बकरियाँ, गां-बळधां, मोट्टे पशुआं, अर मेम्नों, अर जो किमे आच्छा था, उनपै शाऊल अर उसकी प्रजा नै दया करी, अर उन ताहीं नाश करणा न्ही चाह्या; पर जो किमे तुच्छ अर निकम्मा था उसका उननै सत्यानाश करया।
10 फेर यहोवा का यो वचन शमूएल के धोरै पोहच्या, 11 "मै शाऊल नै राजा बणा के पछताऊँ सूं; क्यूँके उसनै मेरे पाच्छै चालणा छोड़ दिया, अर मेरे हुकम का पाळण न्ही करया।" फेर शमूएल का छो भड़क्या; अर वो रात भर यहोवा की दुहाई देन्दा रह्या। 12 जिब शमूएल शाऊल तै भेंट करण खात्तर सुबेरै उठ्या; फेर शमूएल ताहीं यो बताया गया, "शाऊल कर्मेल नगर म्ह आया था, अर अपणे खात्तर एक स्मारक खड्या करया, अर घूमकै गिलगाल चल्या गया सै।" 13 फेर शमूएल शाऊल के धोरै गया, अर शाऊल नै उसतै कह्या, "तन्नै यहोवा की और तै आशीष मिलै; मन्नै यहोवा का हुकम पूरा करया सै।" 14 शमूएल नै कह्या, "फेर भेड़-बकरियाँ का यो मिमियाना, अर गां-बळधां का यो रम्भाणा जो मन्नै सुणाई देवै सै, यो के होण लागरया सै?" 15 शाऊल नै कह्या, "वे तो अमालेकियाँ के उरै आए सैं; यानिके प्रजा के माणसां नै आच्छी तै आच्छी भेड़-बकरियाँ अर गां-बळधां ताहीं तेरे परमेसवर यहोवा के खात्तर बलि करण ताहीं छोड़ दिया सै; अर बाकी सारी का तो मन्नै सत्यानाश कर दिया सै।" 16 फेर शमूएल नै शाऊल तै कह्या, "ठहर जा! अर जो बात यहोवा नै आज रात नै मेरे ताहीं कही सै वो मै तन्नै बताऊँ सूं।" उसनै कह्या, "कह दे।"
17 शमूएल नै कह्या, "जिब तू अपणी नजर म्ह छोट्टा था, फेर के तू इस्राएली गोत्रां का प्रधान ना हो गया? अर के यहोवा नै इस्राएल पै राज्य करण ताहीं तेरा अभिषेक न्ही करया? 18 अर यहोवा नै तेरे ताहीं एक विशेष काम करण ताहीं भेज्या, अर कह्या, ‘जाकै उन पापी अमालेकियाँ का सत्यानाश कर, अर जिब ताहीं वे मिट ना जावैं, तब ताहीं उनतै लड़दा रह।’ 19 फेर तन्नै क्यांतै यहोवा की या बात टाळकै लूट पै टूटकै वो काम करया जो यहोवा की नजर म्ह बुरा सै?"
20 शाऊल नै शमूएल तै कह्या, "इस म्ह कोए शक कोनी मन्नै यहोवा की बात मानकै जित्त यहोवा नै मेरे ताहीं भेज्या औड़ै चाल्या, अर अमालेकियाँ के राजा ताहीं ले आया सूं, अर अमालेकियाँ का सत्यानाश करया सै। 21 पर प्रजा के माणस लूट म्ह तै भेड़-बकरियाँ, अर गां-बळधां, यानिके नाश होण की उत्तम-उत्तम चिज्जां ताहीं गिलगाल म्ह तेरे परमेसवर यहोवा खात्तर बलि चढ़ाण खात्तर ले आए सां।" 22 शमूएल नै कह्या,
"के यहोवा होमबलियाँ, अर मेलबलियां तै उतणा खुश होवै सै,
जितना के अपणी बात के मान्ने जाण तै खुश होवै सै?
सुण, मानणा तो बलि चढ़ाण तै अर कान लगाणा मिंढयाँ की चर्बी तै बाध सै।।
23 देख, बलवा करणा अर भावी कहण आळयां तै पूछणा एक ए बराबर पाप सै,
अर हठ करणा मूरतां अर गृहदेवत्यां की पूजा के बराबर सै।
तन्नै जो यहोवा की बात ताहीं तुच्छ जाण्या,
ज्यांतै उसनै तेरे ताहीं राजा होण खात्तर तुच्छ जाण्या सै।"
24 शाऊल नै शमूएल तै कह्या, "मन्नै पाप करया सै; मन्नै तो अपणी प्रजा के माणसां का भय मानकै अर उनकी बात सुणकै यहोवा के हुकम अर तेरी बात्तां का उलंघण करया सै। 25 पर इब मेरे पाप ताहीं माफ कर, अर मेरे गैल लौट आ, के मै यहोवा नै दण्डवत करुँ।" 26 शमूएल नै शाऊल तै कह्या, "मै तेरे साथ न्ही लौटुगा; क्यूँके तन्नै यहोवा की बात ताहीं त्याग दिया सै, अर यहोवा नै तेरे ताहीं इस्राएल का राजा होण खात्तर तुच्छ जाण्या सै।" 27 फेर शमूएल जाण खात्तर घूम्या, अर शाऊल नै उसके बागे की छोर ताहीं पकड्या, अर वो पाटग्या। 28 फेर शमूएल नै उसतै कह्या, "आज यहोवा नै इस्राएल के राज्य ताहीं पाड़कै तेरे तै छीन लिया, अर तेरे एक पड़ोसी ताहीं जो तेरे तै आच्छा सै दे दिया सै। 29 अर जो इस्राएल का बलमूल सै वो ना तो झूठ बोल्दा अर ना पछतावै सै; क्यूँके वो माणस कोनी, के पछतावै।" 30 उसनै कह्या, "मन्नै पाप तो करया सै; तोभी मेरी प्रजा के पुरनियां अर इस्राएल के स्याम्ही मेरा आदर कर, अर मेरे साथ लौट, के मै तेरे परमेसवर यहोवा ताहीं दण्डवत करुँ।" 31 फेर शमूएल लौटकै शाऊल कै पाच्छै गया; अर शाऊल नै यहोवा ताहीं दण्डवत करया।
32 तब शमूएल नै कह्या, "अमालेकियाँ के राजा अगाग ताहीं मेरे गैल ले आओ।" फेर अगाग आनन्द कै गैल यो कहन्दा होया उसके धोरै गया, "पक्का मौत का दुख जान्दा रहया।" 33 शमूएल नै कह्या, "जिसी बिरबानियाँ तेरी तलवार तै मजबूर होई सैं, उस्से तरियां तेरी माँ बिरबानियाँ म्ह मजबूर होगी।" तब शमूएल नै अगाग ताहीं गिलगाल म्ह यहोवा के स्याम्ही टुकड़े-टुकड़े करया।
34 तब शमूएल रामाह चला गया; अर शाऊल अपणे नगर गिबा कान्ही अपणे घर गया। 35 अर शमूएल नै अपणे जीवन भर शाऊल तै फेर भेंट कोनी करी, क्यूँके शमूएल शाऊल खात्तर बिलाप करदा रहया। अर यहोवा शाऊल नै इस्राएल का राजा बणाकै घणा दुखी होया।