दाऊद अर पवित्र रोट्टी
1 फेर दाऊद नोब नगर गया अर अहीमेलेक याजक के धोरै आया; अर अहीमेलेक दाऊद तै भेंट करण ताहीं थरथरान्दा होया लिकड्या, अर उसतै पूछ्या, "के कारण सै के तू एक्ला सै, अर तेरे गैल कोए न्ही?" 2 दाऊद नै अहीमेलेक याजक तै कह्या, "राजा नै मेरे ताहीं एक काम करण का हुकम देकै मेरै तै कह्या, ‘जिस काम ताहीं मै तन्नै भेज्जू सूं, अर जो हुकम मै तन्नै देऊँ सूं, वो किसे पै जाहिर न्ही होण पावै;’ अर मन्नै जवानां ताहीं फलाणी जगहां पै जाण खात्तर समझाया सै। 3 इब तेरे हाथ म्ह के सै? पाँच रोट्टी, या जो किमे मिले उसनै मेरे हाथ म्ह दे।" 4 याजक नै दाऊद तै कह्या, "मेरे धोरै साधारण रोट्टी तो कोनी, सिर्फ पवित्र रोट्टी सै21:4 पवित्र रोट्टी का मतलब उन रोटियाँ तै सै जो हर सब्त के दिन परमेसवर ताहीं चढ़ाई जावैं थी। या रोट्टी केवल याजकां नै ए खाणी थी (लैव्य. 24:5-9)। इतणा हो की वे जवान जनानियाँ तै न्यारे रहे हों।" 5 दाऊद नै याजक ताहीं जवाब देकै उसतै कह्या, "सच सै के हम तीन दिन तै जनानियाँ तै दूर सां; फेर जिब मै लिकड़ आऊँ सूं, तब जवान्नां के बरतन पवित्र होवै सै; यद्यपि यात्रा साधारण होवै सै, तो आज उनके बरतन पक्का ए पवित्र21:5 पवित्र जवानां की देह पवित्र होगी होंगे।" 6 फेर याजक नै उस ताहीं पवित्र रोट्टी दी; क्यूँके दुसरी रोट्टी ओड़ै ना थी, सिर्फ भेंट की रोट्टी थी जो यहोवा के धोरै तै ठाई गई थी, के उसके ठा लेण के दिन गरम रोट्टी रक्खी जावै।