दसवीं विपत्ति - जेठ्यां की मौत
29 इसा होया के आध्धी रात म्ह यहोवा नै मिस्र देश म्ह सिंहासन पै बैठण आळे फिरौन तै लेकै जेळ म्ह पड़े होए गुलाम ताहीं सारया कै जेठ्यां नै, बल्के डांगरां तक के सारे जेठ्यां ताहीं मार दिया। 30 अर फिरौन अर उसके सारे कर्मचारी रात नै ए उठ बैठ्ठे; अर मिस्र देश म्ह बड़ा हाहाकार माच्या, क्यूँके एक भी इसा घर न्ही था जिस म्ह कोए मरया ना हो। 31 फेर फिरौन नै राते-रात मूसा अर हारुन ताहीं बुलवाकै कह्या, "थम इस्राएलियाँ समेत मेरी प्रजा कै बीच म्ह तै चले जाओ; अर अपणे कहण कै मुताबिक जाकै यहोवा की उपासना करो। 32 अपणे कहण कै मुताबिक अपणी भेड़-बकरी अर गां-बळधां के झुण्ड नै गैल ले जाओ; अर मन्नै भी आशीर्वाद देकै जाओ।"
33 अर मिस्रियाँ नै इस्राएली माणसां पै दाब गेर कै कह्या, "‘हम तो सारे मर मिटे सां,’ देश तै जल्दी करकै लिकड़ जाओ।" 35 इस्राएलियाँ नै मूसा कै कहण कै मुताबिक मिस्रियाँ तै सोन्ने-चाँदी के गहणे अर कपड़े माँग लिए। 36 अर यहोवा नै मिस्रियाँ ताहीं अपणी प्रजा कै माणसां पै इसा दयालु बणाया के उननै जो-कुछ मांग्या वो सब उन ताहीं दे दिया। इस तरियां इस्राएलियाँ नै मिस्रियाँ के धन ताहीं लूट लिया।