पवित्र तम्बू का आँगण
9 "फेर मिलापआळे तम्बू का आँगण बणवाईये। उसकी दक्षिण दिशा कै खात्तर सौ हाथ की लम्बाई रहण दे अर बढ़िया बटी होई सूक्ष्म सणी के कपड़े के सारे पड़द्यां नै मिलाईये; एक ओड़ पै तो इतणाए हो। 10 जिसके बीस खम्भे अर इनकै खात्तर पीत्तळ की बीस पट्टी बणै, अर खम्भ्यां कै कुण्डे अर उनकी पट्टी चाँदी की हों। 11 अर आँगण की उत्तरी दिशा की ओड़ की लम्बाई म्ह भी सौ हाथ लाम्बे पड़दे हों, अर उनकै भी बीस खम्भे अर इनकै खात्तर भी पीत्तळ कै बीस खान्ने हों; अर उन खम्भ्यां के कुण्डे अर पट्टी चाँदी की हों। 12 फेर आँगण की चौड़ाई म्ह पश्चिम की ओड़ पचास हाथ के पड़दे हों, उनकै खम्भे दस अर पाए भी दस हों। 13 पूरब दिशा की ओड़ पै आँगण की चौड़ाई पचास हाथ की हो। 14 अर आँगण के दरबाजे की एक ओड़ पन्द्रह हाथ के पड़दे हों, अर उनकै तीन खम्भे अर पाए भी तीन हों। 15 अर दुसरी ओड़ भी पन्द्रह हाथ के पड़दे हों, उनकै भी खम्भे तीन अर पाए तीन हों। 16 आँगण के दरबाजे कै खात्तर एक पड़दा बणवाईये, जो नीले, बैंगणी अर लाल रंग के कपड़े अर बटी होई सूक्ष्म सणी के कपड़े का कामदार बण्या होया बीस हाथ का हो, उसकै च्यार खम्भे अर पाए भी च्यार हों। 17 आँगण के चौगरदे के सारे खम्भे चाँदी की पट्टियाँ तै जुड़े होए हों, उनके कुण्डे चाँदी के अर पाए पीत्तळ के हों। 18 आँगण की लम्बाई सौ हाथ की, अर उसकी चौड़ाई पचास हाथ की अर उसकी कनात की ऊँचाई पाँच हाथ की हो, उसकी कनात बटी होई सूक्ष्म सणी के कपड़े की बणै, अर खम्भ्यां के पाए पीत्तळ के हों।