मिस्रियाँ पै दस विपत्ति
14 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, "फिरौन का मन कठोर होग्या सै अर वो इस प्रजा नै जाण न्ही देन्दा। 15 काल सबेरै जो लाठ्ठी साँप बणगी थी, उसनै हाथ म्ह लिये होए फिरौन कै धोरै जा, जिब वो पाणी की ओड़ बाहर आवैगा; नील नदी कै किनारे पै उसतै फेटण कै खात्तर खड्या रहिये। 16 अर उसतै इस तरियां कहिये, ‘इब्रियाँ के परमेसवर यहोवा नै मेरै ताहीं न्यू कहण कै खात्तर तेरे धोरै भेज्या सै के तू मेरी प्रजा के माणसां नै जाण दे ताके वे जंगळ-बियाबान म्ह मेरी उपासना करैं; अर इब तक तन्नै मेरा कहणा न्ही मान्या। 17 यहोवा न्यू कहवै सै, के इसतै तू जाण लेगा के मै यहोवा ए परमेसवर सूं; देख, मै अपणे हाथ की लाठ्ठी नै नील नदी कै पाणी पै मारूँगा, अर पाणी खून म्ह बदल ज्यागा, 18 फेर जो मच्छी नील नदी म्ह सैं वे मर ज्यागी, अर नील नदी म्ह तै बांस आण लाग्गैगी, अर मिस्रियाँ का जी नदी का पाणी पीणा न्ही चाहवैगा।’" 19 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, "हारुन तै कह के अपणी लाठ्ठी लेकै मिस्र देश म्ह जितनी पाणी की नदी, नहर, झील, अर पाणी के चोए सैं, सारया कै उप्पर अपणा हाथ बढ़ाकै उनका पाणी खून म्ह बदल ज्या; अर सारे मिस्र देश म्ह काट अर पत्थर दोनु ढाळ के पाणी के बासणा म्ह लहू ए लहू हो जावैगा।"
पैहली विपत्ति - पाणी का लहू म्ह बदलणा
20 फेर मूसा अर हारुन नै यहोवा के हुकम कै मुताबिक करया, यानिके उसनै लाठ्ठी ठाकै फिरौन अर उसकै कर्मचारियाँ कै देखदे नील नदी कै पाणी पै मारी, अर नदी का सारा पाणी खून म्ह बदल ग्या। 21 अर नील नदी म्ह जो मच्छी थी वे मरगी; अर नदी म्ह तै बांस आण लाग्गी, अर मिस्री माणस नदी का पाणी न्ही पी सके; अर सारे मिस्र देश म्ह खून ए खून होग्या। 22 फेर मिस्र देश के जादूगरां नै भी अपणे तंत्र-मंत्रां तै उस्से तरियां ए करया; फेर भी फिरौन का मन हठील्ला होग्या, अर यहोवा के कहण कै मुताबिक उसनै मूसा अर हारुन की बात न्ही मान्नी। 23 फिरौन नै इसपै भी ध्यान कोनी दिया, अर मुँह फेरकै अपणे घरां चल्या गया। 24 अर सारे मिस्री माणस पीण कै पाणी खात्तर नील नदी कै लोवै-धोरै खोदण लाग्गे, क्यूँके वे नदी का पाणी न्ही पी सकैं थे।
25 जिब यहोवा नै नील नदी ताहीं मारया था तब तै सात दिन हो लिए थे।