पाँचवीं विपत्ति - पशुआं की मौत
1 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, "फिरौन कै धोरै जाकै कह, ‘इब्रियाँ का परमेसवर यहोवा तेरै तै इस तरियां कहवै सै, के मेरी प्रजा के माणसां नै जाण दे, ताके वो मेरी उपासना करै। 2 अर जै तू उन ताहीं जाण ना देवै अर इब भी पकड़े रहवै, 3 तो सुण, तेरे जो घोड़े, गधे, ऊँट, गां-बळध, भेड़-बकरी अर सारे पशुआं के झुण्ड जो मदानां म्ह सैं, उनकै बिरुध्द यहोवा का हाथ इसा पड़ैगा के घणी भारी महामारी होवैगी। 4 पर यहोवा इस्राएलियाँ कै डांगरां म्ह अर मिस्रियाँ कै डांगरां म्ह इसा अन्तर करैगा के जो इस्राएलियाँ के सैं उन म्ह तै कोए भी न्ही मरैगा।’" 5 फेर यहोवा नै एक बखत ठहराकै कह्या, "मै कल इस देश म्ह भोत बड़ी महामारी ल्याऊँगा।" 6 दुसरे दिन यहोवा नै इसाए करया; अर मिस्र देश के तो सारे पशु मरगे, पर इस्राएलियाँ का एक भी पशु न्ही मरया। 7 अर फिरौन नै माणसां ताहीं भेज्या, अर पता लगाया के इस्राएलियाँ के डांगरां म्ह तै एक भी न्ही मरया था। फेर भी फिरौन का मन कठोर होग्या, अर उसनै उन माणसां ताहीं जाण न्ही दिया।