सातवीं विपत्ति ओळयां की बारिस
13 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, "सबेरै उठकै फिरौन कै स्याम्ही खड्या हो, अर उसतै कह, ‘इब्रियाँ का परमेसवर यहोवा इस तरियां कहवै सै, के मेरी प्रजा के माणसां नै जाण दे, ताके वे मेरी उपासना करै। 18 सुण, काल मै इस्से बखत इसे भारी-भारी ओळे बरसाऊँगा, के जिनकै बराबर मिस्र देश की नीम पड़ण के दिन तै लेकै इब ताहीं कदे न्ही पड़े।
22 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, "अपणा हाथ अकास की ओड़ बढ़ा ताके सारे मिस्र देश कै माणसां, डांगरां अर खेत्तां की सारी पैदावार पै ओळे गिरै।" 23 फेर मूसा नै अपणी लाठ्ठी अकास की ओड़ ठाई; फेर यहोवा की सामर्थ तै बाद्दळ गरजण अर ओळे बरसण लाग्गे, अर आग धरती पै गिरण लाग्गी। इस तरियां यहोवा नै मिस्र देश म्ह ओळे बरसाए। 24 जो ओळे पड़ै थे उनकै गेल्या बिजळी भी चमकै थी, अर वे ओळे इतणै भारी थे के जिब तै मिस्र देश बस्या था जिब तै मिस्र देश म्ह इसे ओळे कदे न्ही पड़े थे। 25 सारे मिस्र के खेत्तां म्ह के माणस अर पशु, जितने थे सारे ओळयां तै मारे गए, अर ओळयां तै खेत की सारी पैदावार खतम होगी, अर मैदान के सारे दरखत्त भी टूटगे। 26 सिर्फ गोशेन परदेस म्ह जड़ै इस्राएली बस्या करदे ओळे न्ही गिरे।
27 फेर फिरौन नै मूसा अर हारुन ताहीं बुलावा भेज्या अर उनतै कह्या, "इस बार मन्नै पाप करया सै; यहोवा नै सही करया सै, अर मन्नै अर मेरी प्रजा नै गलत करया सै। 31 सण अर जौ की सारी फसल ओळयां तै खतम होगी, क्यूँके जौं की बाल लिकड़ ली थी अर सण म्ह फूल लाग्गे होए थे। 32 गेहूँ अर कठिया गेहूँ जो बढ़े न्ही थे, इस करकै वे नाश न्ही होए।