अय्यूब के बाळकां अर जायदाद का नाश
13 एक दिन अय्यूब के बेट्टे-बेट्टी बड़े भाई के घर म्ह खाण अर दाखमधु पीण लागरे थे; 14 फेर एक दूत अय्यूब कै धोरै आकै कहण लाग्या, "हम तो बळधां तै हळ जोत्तण लागरे थे अर सारी गधी उनकै धोरै चरण लागरी थी 15 तो शेबा देश के लोग हमला करकै उननै लेगे, अर तलवार तै तेरे सेवकां ताहीं मार दिया; अर मै एक्ला ए बचकै तन्नै या खबर देण खात्तर आया सूं।" 16 वो इब्बे यो कहणे लाग रहया था के दूसरा भी आकै कहण लाग्या, "परमेसवर की आग आसमान तै गिरी अर उसतै सारी भेड़-बकरी अर सेवक जळकै भस्म होगे; अर मै एक्ला ए बचकै तन्नै या खबर देण खात्तर आया सूं।" 17 वो इब्बे यो कहणे लाग रहया था, के एक और भी आकै कहण लाग्या, "कसदी माणस तीन दल बाँधकै ऊँटां पै हमला करकै उननै लेगे, अर तलवार तै तेरे सेवकां ताहीं मार गेरया; अर मै एक्ला ए बचकै तन्नै खबर देण नै आया सूं।" 18 वो इब्बे यो कहण ए लाग रहया था, के एक और भी आकै कहण लाग्या, "तेरे बेट्टे-बेट्टी बड़े भाई के घर म्ह खाण अर दाखमधु पीण लागरे थे, 19 के जंगल की ओड़ तै घणी तेज हवा चाल्ली, अर घर के च्यांरु कुण्यां कै इसा झोंक्का मारया, के वो जवानां पै गिर पड़या अर वे मरगे; अर मै एक्ला ए बचकै तन्नै खबर देण नै आया सूं।"