शूही बिल्दद का वचन
1 फेर शूही बिल्दद नै कह्या,
2 "थम कद ताहीं फंदे लगा-लगा कै वचन पकड़दे रहोगे?
चित्त लगाओ, फेर हम बोल्लागें।
3 हम क्यूँ थारी निगांह म्ह पशु की तरियां समझे जावां सां,
अर मूर्ख ठहरे सां।
4 हे अपणे आप नै छो म्ह पाड़ण आळे
के तेरै कारण धरती उजड़ ज्यागी,
अर चट्टान अपणी जगहां तै हट ज्यागी?"
5 "फेर भी दुष्टां का दीवा बुझ ज्यागा,
अर उसकी आग की लौ ना चमकैगी।
6 उसके डेरे म्ह का चान्दणा अँधेरा हो ज्यागा,
अर उसके उप्पर का दीवा बुझ ज्यागा।
7 उसके बड़े-बड़े कदम छोट्टे हो ज्यांगे
अर वो अपणी ए योजना के जरिये गिरैगा।
8 वो अपणा ए पैर जाळ म्ह फसावैगा,
वो फंन्दयाँ पै चाल्लै सै।
9 उसकी एड्डी फंदे म्ह फँस जावैगी,
अर वो जाळ म्ह पकड्या जावैगा18:9 जाळ म्ह पकड्या जावैगा लूटेरे उसनै लूट्टैंगे।
10 फंदे की रस्सी उसके खात्तर धरती म्ह,
अर जाळ रास्ते म्ह छिपा दिया गया सै।
11 च्यांरु ओड़ तै डरावणी चीज उसनै डरावैंगी
अर उसके पाच्छै पड़कै उसनै भजावैंगी।
12 उसका जोर दुख तै घट ज्यागा,
अर मुसीबत्त उसकै धोरै तैयार रहवैगी।
13 वो उसके अंग नै खा ज्यागी,
बल्के मौत का जेठ्ठा उसके अंगां नै खा लेवैगा।
14 अपणे जिस डेरे का भरोस्सा वो करै सै,
उसतै वो खोस लिया जावैगा;
अर वो डरावणे राजा कै धोरै पोहचाया जावैगा।
15 जो उसके ओड़ै का न्ही सै वो उसके डेरे म्ह वास करैगा,
अर उसके घर पै गन्धक बिखरा दी जावैगी।
16 उसकी जड़ तो सूख ज्यागी,
अर डाळी कट ज्यागी।
17 धरती पै तै उसकी याद मिट ज्यागी,
अर बजार म्ह उसका नाम कदे न्ही सुणाई देवैगा।
18 वो चाँदणा तै अँधेरे म्ह धकेल दिया जावैगा,
अर जगत म्ह तै भी भजाया जावैगा।
19 उसके कुण्बे म्ह उसका कोए बेट्टा-पोत्ता न्ही रहवैगा,
अर जित्त वो रहवै था, ओड़ै कोए बच्या न्ही रहवैगा।
20 उसका दिन देखकै पश्चिम के लोग बेचैन होवैंगे,
अर पूर्व के बासिन्दया के रूंगटे खड़े हो ज्यागें18:20 उसका दिन देखकै पश्चिम के लोग बेचैन होवैंगे, अर पूर्व के बासिन्दया के रूंगटे खड़े हो ज्यागें ठीक उस्से तरियां जिसे उसतै पैहला आळे माणस उसके नाश के दिन तक डरे थे, जो उसके पाच्छै रहवै सै वे भी भयभीत होंगे।
21 बे-शक कपटी माणसां का बसेरा इस्से तरियां का हो ज्या सै,
अर जिस ताहीं परमेसवर का ज्ञान न्ही रहन्दा,
उसकी जगहां भी इसीए हो ज्या सै।"