12 वेदी पै आग जळदी रहवै, अर कदे बुझण न्ही पावै; अर याजक हरेक दिन तड़कैए तड़क नै उसपै लाकड़ी बाळ कै होमबलि के टुकड्या नै उसकै उप्पर सजा कै धरदे, अर उसकै उप्पर मेलबलियां की चर्बी नै जळाया करै। 13 वेदी पै आग लगातार जळदी रहवै; वो कदे बुझण न्ही पावै।"
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