1 फेर यहोवा नै मूसा तै कह्या, 2 "हारुन अर उसकै बेट्याँ तै अर सारे इस्राएल के माणसां तै कह के यहोवा नै यो हुकम दिया सै: 3 इस्राएल कै घरान्यां म्ह तै कोए माणस हो जो बळध या भेड़ कै बच्यां, या बकरी नै, चाहे छावणी म्ह चाहे छावणी तै बाहर मारकै 4 मिलापआळे तम्बू कै दरबाजे पै, यहोवा के निवास कै स्याम्ही यहोवा के चढ़ाण कै खात्तर ना ले जावै, तो उस माणस कै लहू बहाण का दोष लाग्गैगा; अर वो माणस लहू बहाण आळा ठहरैगा, वो अपणे माणसां कै बिचाळै तै नाश करया जावै। 5 इस विधि का यो कारण सै के इस्राएली अपणे बलिदान जिननै वे खुल्ले मदानां म्ह मारण जावैं सै, वे उननै मिलापआळे तम्बू के दरबाजे पै याजक कै धोरै, यहोवा कै खात्तर ले जाकै उस्से कै खात्तर मेलबलि करकै बलिदान करया करैं; 6 अर याजक लहू नै मिलापआळे तम्बू के दरबाजे पै यहोवा की वेदी कै उप्पर छिड़कै, अर चर्बी नै उसकै सुखदायक सुगन्ध कै खात्तर जळावै। 7 वे जो बकरयां कै पूजण आळे होकै जारी करैं सै वे फेर अपणे बलिपशुआँ नै उनकै खात्तर बलिदान ना करैं। थारी पीढ़ियाँ कै खात्तर न्यू सदा की विधि होवैगी।"
8 "तू उनतै कह के इस्राएल के कुण्बे के माणसां म्ह तै या उनकै बिचाळै रहण आळे परदेशियाँ म्ह तै कोए माणस क्यूँ ना हो जो होमबलि या मेलबलि चढ़ावै, 9 अर उसनै मिलापआळे तम्बू कै दरबाजे पै यहोवा कै खात्तर चढ़ाण नै ना ल्यावै; वो माणस अपणे माणसां म्ह तै नाश करया जावै।"
10 "फेर इस्राएल के कुण्बे के माणसां म्ह तै या उनकै बिचाळै रहण आळे परदेशियाँ म्ह तै कोए माणस क्यूँ ना हो जो किसे ढाळ का लहू खावै, मै उस लहू खाणआळे कै बिरुध्द होकै उसनै उनके माणसां कै बिचाळै म्ह तै नाश कर दियुँगा। 11 क्यूँके शरीर का प्राण लहू म्ह होवै सै; अर उस ताहीं मन्नै थारे माणसां तै वेदी पै चढ़ाण कै खात्तर दिया सै के थारे प्राणां कै खात्तर प्रायश्चित करया जावै; क्यूँके प्राण कै खात्तर लहू तै ए प्रायश्चित होवै सै। 12 इस करकै मै इस्राएल के माणसां तै कहूँ सूं के थारै म्ह तै कोए प्राणी लहू न्ही खावै, अर जै परदेशी थारै बिचाळै रहन्दे हो वो भी लहू कदे न्ही खावै।"
13 "इस्राएलियाँ म्ह तै या उनकै बिचाळै रहण आळे परदेशियाँ म्ह तै, कोए माणस क्यूँ न्ही हो, जो शिकार करकै खाण के लायक पशु या पंछी नै पकड़ै, वो उसके लहू नै उण्डेल कै धूळ तै ढक दे। 14 क्यूँके शरीर का प्राण जो सै, वो उसका लहू ए सै जो उसकै प्राण कै गेल्या एक सै; ज्यांतै मै इस्राएलियाँ तै कहूँ सूं, के किसे ढाळ के प्राणी कै लहू नै थम ना खाईयों, क्यूँके सारे प्राणियाँ का प्राण उनका लहू ए सै; जो कोए उसनै खावै सै, वो नाश करया जावैगा। 15 अर चाहे, वो देशी हो या परदेशी हो, जो कोए किसे लोथ या पाड़े होए पशु का माँस खावै सै वो अपणे कपड़ेयां नै धोवै अर पाणी तै नहावै, अर साँझ तक अशुद्ध रहवै; फेर वो शुद्ध होवैगा। 16 पर जै वो उननै न्ही धोवै अर ना नहावै, तो उसनै अपणे अधर्म का बोझ खुद ठाणा पड़ैगा।"