1 इस करकै थम अपणे भाईयाँ तै अम्मी अर अपणी भाणां तै रुहामा कहो।
2 "अपणी माँ तै विवाद करो, विवाद क्यूँके वो मेरी जनान्नी न्ही, अर ना मै उसका घरआळा सूं। वो अपणे मुँह पै तै अपणे ओछापण नै अर अपणी छातियाँ कै बीच तै व्यभिचारां नै अलग करै; 3 न्ही तो मै उसके कपड़े तारकै उसनै जन्म के दिन की तरियां नंगी कर दियुँगा, अर उसनै मरुस्थल की तरियां अर मरुभूमि सरीखी कै जिसी बणाऊँगा, अर उसनै प्यास तै मार दियुँगा। 4 उसके बाळकां पै भी मै कुछ दया न्ही करुँगा, क्यूँके वे कुकर्म के बाळक सैं। 5 उनकी माँ नै ओछापण करया सै; जिसके गर्भ म्ह वे पड़े, उसनै शर्म कै लायक काम करया सै। उसनै कह्या, ‘मेरे यार जो मेरे ताहीं रोट्टी-पाणी, ऊन, सण, तेल अर मदिरा देवैं सैं, मै उन्हे कै पाच्छै चाल्लुँगी।’ 6 इसनै देक्खो, मै उसके राह नै काण्डयाँ तै घेरुँगा, अर इसा बाड़ा खड्या करुँगा के वा राह ना पा सकैगी। 7 वो अपणे यारां कै पाच्छै चाल्लण तै भी उननै ना पावैगी; अर उननै ढूँढ़ण तै भी ना पावैगी। फेर वा कहवैगी, ‘मै अपणे पैहले पति कै धोरै फेर बोहड़ जाऊँगी, क्यूँके मेरी पैहली हालत इस बखत की हालत तै आच्छी थी।’ 8 वा या न्ही जाणै थी, के अन्न, नया दाखमधु अर तेल मै ए उसनै देऊँ था, अर उसकै खात्तर वो चाँदी-सोन्ना जिस ताहीं वे बाल देवता के काम म्ह ले आवैं सैं, मै ए बढ़ाऊँ था। 9 इस कारण मै अन्न के मौसम म्ह अपणे अन्न नै, अर नये दाखमधु के होण कै बखत म्ह अपणे नये दाखमधु नै हर ल्यूँगा; अर अपणा ऊन अर सण भी जिनतै वा अपणी देह ढाँप्पै सै, मै छीन ल्यूँगा। 10 इब मै उसके यारां कै स्याम्ही उसके देह नै उघाड़ूँगा, अर मेरे हाथ तै कोए उसनै छुड़ा न्ही सकैगा। 11 अर मै उसके त्यौहार, नये चाँद अर विश्रामदिन बाकी सारे नियत बखतां के त्यौहारां का अन्त कर दियुँगा। 12 मै उसकी दाख की बेल अर अंजीर के दरखतां नै, जिनके बारै म्ह वा कहवै सै के या मेरे ओच्छेपण की कमाई सै जिस ताहीं मेरे यारां नै मेरे ताहीं दिया सै, उननै इसा उजाड़ूँगा के वे जंगळ जिसे हो जावैंगे, अर जंगळी-पशु उननै चर लेवैगें। 13 वे दिन जिन म्ह वा बाल देवत्यां कै खात्तर धूप जळान्दी, अर नथली अर हार पहरे अपणे यारां कै पाच्छै जान्दी अर मेरे ताहीं भूल्ली रहवै थी, उन दिनां की सजा मै उसनै देऊँगा, यहोवा की याए वाणी सै।"
14 "इस करकै देक्खो, मै उसनै मोहित करकै जंगळ म्ह ले जाऊँगा, अर ओड़ै उसतै शान्ति की बात कहूँगा। 15 ओड़ैए मै उसनै दाख की बारियाँ देऊँगा, अर आकोर की तराई नै उम्मीद का द्वार कर दियुँगा अर ओड़ै वा मेरे ताहीं इसी बात कहवैगी जिसी अपणी जवानी के दिनां म्ह यानिके मिस्र देश तै चाल्ले आण कै बखत कहवै थी। 16 अर यहोवा की या वाणी सै के उस बखत तू मेरे ताहीं पति कहवैगी अर फेर बाली ना कहवैगी। 17 क्यूँके भविष्य म्ह मै उसनै बाल देवत्यां के नाम न्ही लेण देऊँगा; अर ना उनके नाम फेर याद रहवैगें। 18 अर उस बखत मै उनकै खात्तर जंगळी-पशुआं अर अकास कै पन्छियाँ अर धरती पर के रेंगण आळे जन्तुआं कै गैल करार करुँगा, अर धनुष अर तलवार तोड़कै युद्ध नै उनके देश तै दूर कर दियुँगा; अर इसा करुँगा के वे माणस निडर सोया करैंगे। 19 मै सदा कै खात्तर तेरे ताहीं अपणी जनान्नी बणाण की प्रतिज्ञा करुँगा, अर या प्रतिज्ञा धार्मिकता, अर न्याय, अर करुणा, अर दया कै गैल करुँगा। 20 या सच्चाई कै गैल करी जावैगी, अर तू यहोवा नै जाण लेवैगी।"
21 "यहोवा की या वाणी सै के उस बखत मै अकास की सुणकै उसनै जवाब देऊँगा, अर वो धरती की सुणकै उसनै उत्तर देवैगा; 22 अर धरती अन्न, नये दाखमधु, अर ताजे तेल की सुणकै उननै जवाब देवैगी, अर वे यिज्रेल नै जवाब देवैंगे। 23 मै अपणे खात्तर उसनै देश म्ह बोऊँगा, अर लोरुहामा पै दया करुँगा, अर लोअम्मी तै कहूँगा, तू मेरी प्रजा सै, अर वो कहवैगा, ‘हे मेरे परमेसवर।’"