18 सुण, जो खरी गल्ल मैं परखी की देखी जो ठीक बी ए, से ये कि माणूं खाओ-पियो ओर आपणी मईणता साथे जो से तरतिया पाँदे करदा रओआ, आपणी पूरी जिन्दगी, जो परमेशरे तेसखे देई राखी, सुखी रओ, कऊँकि तेसरा इस्सा ये ईए।
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18 सुण, जो खरी गल्ल मैं परखी की देखी जो ठीक बी ए, से ये कि माणूं खाओ-पियो ओर आपणी मईणता साथे जो से तरतिया पाँदे करदा रओआ, आपणी पूरी जिन्दगी, जो परमेशरे तेसखे देई राखी, सुखी रओ, कऊँकि तेसरा इस्सा ये ईए।