5 एन्च़रे किछ लोक एक्की दिहाड़ी होरि करां बेद्धतां मनतन, ते किछ सब दिहाड़े बराबर मनतन, हर केन्ची इन याकीन कियेरू लोड़े कि ज़ैन तैना सोचतन तैन ठीके।
Publicidade
5 एन्च़रे किछ लोक एक्की दिहाड़ी होरि करां बेद्धतां मनतन, ते किछ सब दिहाड़े बराबर मनतन, हर केन्ची इन याकीन कियेरू लोड़े कि ज़ैन तैना सोचतन तैन ठीके।