1 आखरी का दिनहोन मे असो हुये कि यहोवा को भवन को पर्वत सब टेकडीहोन पर मजबुत कर्यो जाये, अरु सब टेकडीहोन से जादा उचो कर्यो जाये; अरु हर राज का दुन्या नद्दी का जसा ओका तरप बोहाये. 2 अरु भोत राजहोन का दुन्या जाये, अरु आपस मे बोल्ये,"आओ, हम यहोवा का टेकडी पर चेडीखे, याकुब खे परमेश्वर का भवन मे जाये तब तक हमखे अपनो मार्ग सिखाये, अरु हम ओका रस्ता पर चल्ये."किवकि यहोवा कि व्यवस्था सिय्योन से,अरु ओको वचन यरुशलेम से निकल्ये. 3 उ भोत देशहोन का दुन्याहोन को न्याय कर्ये, अरु दुर-दुर तक कि सामर्थी राजहोन का झगडा खे मिटाऐ; येकालिये वे अपनी तलवार पीटिखे हल को फल, अरु अपना भाला से हसिया बनाया; तब एक राज दुसरी राज सका खिलाप तलवार फिर नि चलाऐ; 4 अरु दुन्या आगे को युद्द विद्या नि सिकनका. पन वे अपनी-अपनी अंगूर का बगीचा मे अरु अंजीर का झाड का निचे बठ्या करे, अरु कोय उनखे नि डरानका; सेनाहोन खे यहोवा ने यही वचन दियो हइ. 5 सब राज्यहोन का दुन्या ते अपना-अपना देवता को नाम लिखे चलस हइ,पन हम दुन्या अपना परमेश्वर यहोवा को नाम लिखे सदा सर्वदा चलता र्हेस हइ
6 यहोवा कि या बोली हइ, वा टेम मे प्रजा का लगडाहोन खे, अरु जबरन निकाल्या हुया खे, अरु जिनखे मेने दुख दियो हइ वे सब खे जमा कर्यु. 7 अरु लगडाहोन खे मि बचय रख्यु, अरु दुर कर्या होन खे सामर्थी राज करी दियु; अरु यहोवा उन पर सिय्योन तक टेकडी का उपर से सदा राज्य करतो र्हिये. 8 हे एदेर का गुम्मट, हे सिय्योन कि टेकडी, तोखे पहले जसो राज मिल्ये, तोखे यरुशलेम को राज्य मिल्ये. 9 अब तु क्युव चिल्लास हइ? का तरा मे कोइ राजो नि र्हियो? का तरा युक्ति करनवाला नष्ट हुई गया, जेकासे जच्चा लुगैन का जसो तोखे पीडा उढस हइ? 10 हे सिय्योन कि बेटी, जच्चा लुगैन का जसो पीडा उठयखे उत्पन कर; किवकि अब तु शहर मे से निकली खे मैदान मे बस्ये, वरन बेबीलोन तक जाये; वहि तु छुढय जाये, मनजे वही यहोवा तोखे तरा दुश्मनहोन का हात से छुढय लिये. 11 अब भोत सा राज का दुनिया तरा खिलाप जमा हुयखे तरा विषय मे बोल्ये, "सिय्योन अपवित्र कर्यो जाये, अरु हम अपनी आखहोन से ओखे खतम होते देख्ये." 12 पन वे यहोवा कि योजना नि जानस, न ओकी युक्ती समजस हइ कि उ उनखे असो जमा करी लेस जसो खलीयान मे पुले जमा करी लेस. 13 हे सिय्योन, उठ अरु दावन कर, मि तरा सिंगहोन खे लोहा का, अरु तरा खुरहोन खे पीत्तल का बनय दियु; अरु तु भोत सा राजहोन खे चुर-चुर कर्ये अरु उनकी कमइ यहोवा कि अरु उनकी धन सम्पती पृ्थ्वी का प्रभु का लिये अर्पन कर्या.