भोर के चमकनेवाले तारे का पतन
12 "हे भोर के चमकनेवाले तारे तू कैसे आकाश से गिर पड़ा है? तू जो जाति-जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है? (लूका 10:18, यहे. 28:13-17) 13 तू मन में कहता तो था, ‘मैं स्वर्ग पर चढूँगा14:13 मैं स्वर्ग पर चढूँगा: अर्थात् उसने अपने को सर्वोच्च स्थान पर लाने की इच्छा की, उसकी मनोकामना थी कि सब उसे सम्मान दें। वह परमेश्वर के अधिकार को स्वीकार करना नहीं चाहता था। ; मैं अपने सिंहासन को परमेश्वर के तारागण से अधिक ऊँचा करूँगा; और उत्तर दिशा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूँगा; (मत्ती 11:23, लूका 10:15) 14 मैं मेघों से भी ऊँचे-ऊँचे स्थानों के ऊपर चढूँगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊँगा।’ 15 परन्तु तू अधोलोक में उस गड्ढे की तह तक उतारा जाएगा। (मत्ती 11:23, लूका 10:15)