12 हे भोर के तारे!
स्वर्ग से तुम अलग कैसे हुए.
तुमने देशों को निर्बल कर दिया था,
तुम काटकर भूमि पर कैसे गिरा दिए गए!
13 तुमने सोचा,
"मैं स्वर्ग तक चढ़ जाऊंगा;
मैं अपना सिंहासन परमेश्वर के
तारागणों से भी ऊपर करूंगा;
मैं उत्तर दिशा के दूर स्थानों में
ज़ेफोन पर्वत पर विराजमान होऊंगा.
14 मैं बादल के ऊपर चढ़ जाऊंगा;
और परम प्रधान परमेश्वर के समान हो जाऊंगा."
15 परंतु तू अधोलोक के नीचे,
नरक में ही उतार दिया गया है.