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यशायाह 64

1 भलि आप आककर सकते,

ि परवत आपकमनांउठे!

2 िरकआग जल

जल उबलतै,

आपकििों आपकरति

ि आपकउपसिि ांउठतैं!

3 जब आपनऐसभयनक िे,

तब आप उतर आए े, परवत आपकउपसिि ें ांउठे.

4 वकउनोंै,

गयै,

आपकिहमिऔर परमवर नहीं ै,

अपनभकों ओर े.

5 आप उनीं िलतैं आनिकरतैं,

आपकरखतआपकों पर चलतैं.

सच ि आप हमरण ि,

और हमयह दशबहसमय ै.

हमें टकिसकतै?

6 हम सभअशमनसमगयै,

हमधरिथडों समै;

हम सभपतों समरझैं,

हमअधरहमें हवें उड़ा ैं.

7 ऐसनहीं आपक

और आपकरहनरययतकरतै;

ोंि आपनहमसअपनुंिि

तथहमें हमइयों कर िै.

8 िंअब, हव, हमनआपकिसमै.

हम िैं, आप हम;

हम सभआपकरचनैं.

9 इसलिहव, िईये;

और अनतक हमों रखि.

हमओर ि,

हम सभआपकअपनैं.

10 आपकपविनगर जर ि गयै;

़िअब नसै! शलउजपड़ा ै.

11 हमपविएवभवभवन, जहां हमवजों आपकि ी,

आग जलिगयै,

हमसभअमवसनषैं.

12 यह सब ी, हव, आप अपनआपकरहेंे?

आप हमें इस दशें रहनेंे?

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