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यशायाह 16

1 नगर

़िपरवत पर,

जर ि िि,

एक मनकरो.

2 आरनपर

आब िां ऐसगईं,

ोंसलपकिों बचों

उड़ा िगयो.

3 "हमें समझ,

हमकरो, और िें हमें ो.

घर िरको,

मत पकड.

4 आब घर िअपनें रहनो;

िकरनों आब बच."

ोंि ुःै,

और कषसम्‍ै;

और ों चलतवह ै.

5 तब दयएक िंसन बनएगा;

और ें

एक यकि सचिजमा—

यह वह यकि िणय कर

और सचकरनें करा.

6 हमनआब अह

उसकअभि,

गरऔर ें ै;

वह सब ा.

7 इसलिआब

आब िो.

और र-हनगर ििों

िुःा.

8 शबतथिबमगई ैं;

ों सकों अचफसल कसकर िा.

9 इसलिैं िा,

और िबमिुःा.

शबतथएलिआल,

ैं ें अपनिूंा!

ोंि फल और उपज

सम्‍गई ै.

10 फलदआनऔर उनकगई ै;

ें नहीं एगा;

खरस नहीं िरहै,

ोंि ैंसब खतकर ै.

11 मन आब ि

और रदय र-हिसमआवकरतै.

12 जब आब पर कर थक

और थनकरनि

पविें ै,

उससउनकयदनहीं ा.

13 यह आब िपहलकहहववचन ै. 14 परअब हवों कहा: "मजदों वरों िनतअन, आब भव िरसें एगऔर उसकबचअतकम और कमजोंे."

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