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यशायाह 2

हवपरवत

1 यहिऔर शलिषय ें आमयशदरशन ा:

2 ि िों

ें वह परवत और पह

िपर हवभवन ै;

उसऔर िा,

और सब ि बहतनदसमउस ओर आएे.

3 और कहेंे,

"आओ, हम हवपरवत,

परमवर भवन चलें.

ि वह हमें अपनियम िं,

और हम उनकों पर चलें."

ोंि ़ियवसिकली,

और शलहववचन आएगा.

4 परमवर ों करें

और ों परिां करेंे.

तब अपनतलवों ट-पटकर हल

तथअपनों िबनेंे.

एक सरितलवनहीं उठा,

तथउनें िकभलडिनहीं िएगा.

5 आओ,

हम हवरकें चलें.

हवि

6 हव, अपनरजा,

िै.

ोंि णतों समगये;

और िििों समउनक

और गयै.

7 उनकऔर ांभरै;

और उनकधन कमनहीं.

और उनक़ों

और रथों भरै.

8 उनकिों भरै;

अपनों बनै.

9 और मनउसकमनकत

और रणकरतैं,

इसलिउनें नहीं िएगा.

10 हवडर तथउनकरतरण

चटें चलऔर ि!

11 मनों घमकरके;

हविा.

12 ोंि हर घमएवअहयकि िसरवशकिहविठहरै,

उस िउनकघमिएगा,

13 और लबसमसवदों,

तथसब ांों पर,

14 समसपहों

और पह़िों पर,

15 समसमटों

और सब शहरपनों पर और,

16 तरशसब जहों

तथसब ुंदर िरकपर.

17 मनघम

और अहिएगा;

और वल हवपर िजमा,

18 सब िां नषकर ी.

19 जब हविकरनिउठें

तब उनकभय तथरतरण

मनचटों ें

तथि गडों ें िेंे.

20 उस िमनअपने-ांिां िें उनोंबनी,

उनें छछूंदरों और चमगदड़ों मनेंेंे.

21 जब हविकरनिउठें

तब उनकभय तथउनकरतरण,

मनचटों ें

तथचटों ें िेंे.

22 मनों रहो,

िनकांपल ै.

िनकमहतनहीं.

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