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यशायाह 54

शलभविमहि

1 यह हवै,

"ां, , करनें असमरो, आनिो.

, रसव ़ा अनजो,

जय जयककरो,

ोंि ,

गन अधिै.

2 अपनपरों ो,

इसमें मत ो;

अपनिों करो,

अपनूंिों करो.

3 ोंि अब तथों ओर बढ़ाओगे;

अनों अधिों

और उजड़े नगर िबसे.

4 "मत डर; ोंि ें लजिनहीं पड़ेा.

मत घबरा; ोंि िलजिनहीं ी.

अपनजवलजओग

और अपनिधवपन बदनिरखे.

5 ोंि ें रचनपति ै—

िसकसबओथ54:5 त्सबाओथ अर्थात् सेना हव

तथइसएल पविपरमवर ैं;

िें समसपर परमवर ै.

6 ोंि हवें

िि उस पतसमी—

िसकिगयो,

और िसकमन ुःा," परमवर यहवचन ै.

7 "पल िैं़ा ा,

परअब बड़ी दयकरकैं िरख ूंा.

8 षणों ि

ें आकर मसैंअपनुंििा,

परअब अनकरऔर

ैं पर दयकरूंा,"

़ाहवयहवचन ै.

9 "ोंि ि ें यह सब समय ै,

जब ैंयह शपथ ि समय जलपरलय अब ैं पर कभकरूंा.

अतअब यह शपथ ि ैं िकभपर नहीं करूंा,

ें कभूंा.

10 पहहट

और पह़िां टल ें,

कभपर हट

तथांि कभटली,"

यह करमय हववचन ै.

11 "िी, सतऔर िसकांि नहीं िी,

अब ैं कलश अमपतथरों जडूंा,

तथों लमणि बना.

12 और ैं िखरों ूंों े,

तथरवों फटिििकरूंा.

13 हविोंे,

और उनकबड़ी ांि िी.

14 िकतिरही:

अतआएगा;

िडर बनरहना;

डर कभआएगा.

15 यदि पर हमलकरे, रखनवह ओर ा;

और वह हरएगा.

16 ", यलआग ें

हथिबनै, वह ैंबन

और ििैंएक बनै.

17 हथिऐसनहीं बनगया, ें कसपहुंसके,

उस यकि ो, पर आरलगै, े.

हववकों यहै,

तथउनकिकतओर ै,"

हवयह वचन ै.

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