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यशायाह 52

1 ़ि, ो,

और अपनबल !

पविनगर शल,

अपनुंदर वसपहन ो.

ोंि अब खतना-रहि

और अशयकि आएे.

2 शल, ो,

अपनऊपर कर उठ .

़िी,

अपनगलें पड़ी उतो.

3 ोंि हवों कहतैं:

"िििगए े,

तथि़ाओगे."

4 ोंि रभहवों कहतैं:

"पहलिइसलिगए े, ि वहां परदकर रहें;

अशिों उनें िरण ुःिे."

5 हवकहै:

"ििरण धक बनिगए,

अब रह गयै,"

हवों कहतैं.

"उन पर सन कर रहैं, उनकसतरहैं,

ििंकरतैं.

6 इस रण अब रजपहची;

और उनें यह एगि ैं ूं,

ि ैं ूं यह कह रहै.

ां, ैं यहां ूं."

7 परवतों पर आतउनकैं,

रहैं,

ांि,

और भलैं,

उदषणकरतैं,

तथ़िकहतैं,

"परमवर ै!"

8 ो! पहरशबरहैं;

सभिलकर जय जयककर रहैं.

ोंि ेंे,

ि हव़िपस बने.

9 शलउजड़े ो,

उचवर जय जयककरो,

ोंि हवअपनों ांि ै,

उनोंशल़ा िै.

10 हवअपनपवि

सभों ििै,

ि र-दसब

हमपरमवर िगयउदेंे.

11 चलयहां े!

िअशवसलग!

हवों उठो,

नगर िकलकर हर चलतथअपनआपककरो.

12 िहर ें उतवलकरन

ऐसचल रहो;

ोंि हवआगे-आगचलेंे,

तथइसएल परमवर रककरतचलेंे.

वक ़ा और महि

13 ों, वक बढएगा;

वह महऔर अति महएगा.

14 िरकें खकर चकि

ोंि उसकयकि

तथउसकलडमनों अधििगडा—

15 वह बहिों िा,52:15 छिड़केगा अर्थात् पवित्र करेगा

ांरहेंोंि ें नहीं कहगई ी.

उनकमनआएी,

और उनोंनहीं ा, उनें समझ एगा.

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