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यशायाह 17

दमिें भवियव

1 दमिें एक भवियवी:

दमएक नगर रहकर डहरों एक बन एगा.

2 अरअर नगर उजकर िगए ैं

वहां पशचरेंऔर आरकरें

और उनें भगनहीं ा.

3 एफईम गढे,

दमें नहीं बचा;

यह सरवशकिहवयह ै.

4 "उस िभव कम एगा;

और उसकशरकमजएगा.

5 और ऐसफसल टकर ों ांे,

इम मक तरें िनतो.

6 पर फल रह ैं,

उसरकइसमें ननिबच एगा,"

यह हव, इसएल परमवर ै.

7 उस िमनअपनिकरओर अपनें उठ

और उनकि इसएल उस पविओर ी.

8 वह अपनबन

और अशमक ि ा.

9 उस समय उनकगढनगर, घनजर ि अथवइसएल डर िगए ो, उनें नषकर िएगा.

10 ोंि अपनउदरकरपरमवर गए;

और अपनचटनहीं िा, इसलितब

अच

और िअनजिलग,

11 उगइसबढ़ा

और मनलगऔर उसमें पल िकल आये,

िंुःऔर तकलरण

उपज नहीं ्‍ी.

12 श-दबहों अपमरहै—

समलहरों समउठतैं!

और रचसमदहैं!

13 पहों और उडकर लतै,

य-रें बहतिखर े.

14 घबरहट ै!

परबह यब ैं!

यह उनकििोंहमें ै,

और इससउनकििोंहमें सतै.

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