7 "धन्य है वह मनुष्य जिसने याहवेह पर भरोसा रखा है,
तथा याहवेह ही जिसका भरोसा हैं.
8 वह व्यक्ति जल के निकट रोपित वृक्ष के सदृश है,
जो जल प्रवाह की ओर अपनी जड़ें फैलाता जाता है.
ग्रीष्मकाल का उसे कोई भय नहीं होता;
उसकी पत्तियां सदैव हरी ही रहेंगी.
अकाल उसके लिए चिंता का विषय न होगा
और इसमें समय पर फल लगना बंद नहीं होगा."