देशै शुक्कअ हुअ खतम
41 तेखअ बोलअ एलियाह अहाब राज़ै लै, "ऐबै डेऊ संघा खा-पिई। मुखा शुण्हिंआं इहअ कि पाणींओ हर्हल-खर्हल च़ाल्लअ रिंगी।"
42 18:42 18:42-45; याक. 5:18 ज़ांऊं अहाब राज़अ खांदअ-पिंदअ डेऊअ, एलियाह उखल़अ कर्मेल धारे च़ुंडी लै संघा पल़अ धरनीं उटी बाखा, आपणअ मूंड किअ तेऊ उंधै ज़ान्हूं जैंदरी उटअ, 43 तेखअ बोलअ तेऊ आपणैं दासा लै, "उझै निखल़ आजू ज़िहअ संघा भाल़ समुंदरा बाखा।" सह दास उखल़अ उझै आजू ज़िहअ समुंदरा बाखा भाल़अ संघा बोलअ, "एथ निं मुखा किछ़ शुझदअ।" एलियाह बोलअ तेऊ लै, "भिई डेऊ साता बारी भाल़।" 44 सातुई बारी ज़ांऊं सह दास बापस फिरअ, तेऊ बोलअ एलियाह लै, "मुखा शुझिआ मणछे हाथा ज़िहअ धख ज़िहअ बादल़।"
एलियाह बोलअ, "तूह डेऊ अहाब राज़ै सेटा लै संघा बोल तेऊ लै, ‘आपणअ रथ ज़ुंडी होथ सरग हणैं का आजी उंधै, नांईं ता तूह शाचणअ एतै।’"
45 तेतरी गऐ हेरा-हेरी सरगै काल़ै घणैं बादल़ घोर्हुई अर ढिश-बागरी आणै झ़ैऊई अर सरगा का लागअ लोदल़-छ़ोदल़ पाणीं। अहाब राज़अ डेऊअ आपणैं रथा दी शुंआर हई जज्रेल खागा लै।