1 इज़राईलो! समाद शूणां! ज़ुंण बिधाता थारै खलाफ बोलअ।
अह समाद आसा तम्हां सोभी इज़राईली लै:
"ज़ुंण मंऐं बिधाता मिसर देशा का आणै तै बच़ाऊई।
2 सारै संसारा का छ़ांटै तै मंऐं बिधाता सिधै तम्हैं इज़राईले टोली,
तैही दैणीं मुंह ऐबै थारै कदुष्ट कामां लै सज़ा बी।"
3 ज़ेभै तैणीं दूई मणछ आप्पू मांझ़ै राज्ज़ी निं हुऐ,
तेभै तैणीं निं तिंयां संघा हांढी सकदै।
4 शकार ढाकै बाझ़ी निं सिह बणैं क्रुंगदअ,
नां खारकअ सिह भुखै पेटै जुहल़ी क्रुंगदअ।
5 बाझ़ी च़ुनणै निं ज़बाल़ा दी च़ेल्लू पेशदअ,
बाझ़ी फाही निं ज़ज़ाल़ा दी च़ेल्लू शाचदअ अर
ज़ेभै तैणीं ज़ज़ाल़ा दी च़ेल्लू निं शाचै, तेभै तैणीं निं शकारी ज़ज़ाल़ झाल़दअ।
6 इहअ निं हई सकदअ कि नगरी दी नर्शिंगै बाज़दै शुण्हिंए अर लोग नांईं डरे!
ज़ेभै तैणीं बिधाता कहा नगरी लै आफ़त निं पाए,
तेभै तैणीं निं तैहा नगरी दी आफ़त एछदी।
7 मालक बिधाता निं कधि आपणैं दास गूरा का भेद खोज़ै बाझ़ी किछ़ै करदअ।
8 सिह क्रुंगदअ शूणीं छ़ुटा सोभी दर्छ़णअ,
मालक बिधाता दैनै दै समादा खोज़णैं का निं कोह पिछ़ू हटदअ।
9 मिसर देश अर अशदोद नगरीए गहल़ै-कोटै खोज़ा इहअ:
"सामरी देशे धारा हआ कठा,
तिधा का लागा भाल़ै कि सामरी देशै
किहै उपद्रभ अर ज़ुल्म आसा हंदै लागै दै।"
10 बिधाता बोला इहअ, "इना मणछा निं भलअ करनअ एछदअ ई आथी! इनै आसा आपणैं गहल़-कोट उपद्रभ अर ज़ुल्म करी झाल़ी दी च़िज़ा करै भरै दै! 11 तैही बोला हुंह इनो मालक बिधाता कि एकी दुशमणा गोटणअ अह देश फेरा-फेर, तेऊ पाणै इने गहल़-कोट ढोल़ी अर इने खज़ानै लुटणैं तेऊ पठी।"
12 बिधाता बोला इहअ, "ज़िहअ फुआल सिहे खाखा का आपणीं भेडे सिधै दूई गुल़छ़ू कि एक कान ई आणा छ़ड़ैऊई, तिहै ई बच़णैं सामरी मुल्खै इज़राईली मांझ़ै सिधै धख ज़िहै ज़िऊंदै। तिंयां हणैं रेशमी च़ादरे पुंझ़ा का बच़ी दी धख ज़ेही शाट्टी अर सारै पलका का बच़ै दै पाऊए एकी ठोरा ज़िहै।"
13 स्वर्गे सारी सैनो मालक बिधाता बोला इहअ, "ऐबै शूणां! याकबे आद-लुआदा लै दैआ चतैनगी। 14 ज़ेभै मुंह इज़राईली लै तिन्नें पापे सज़ा दैणीं, तेभै करनी मुंह बेतेल बणाईं दी बेदी बी खतम। बेदीए कूणैं शोटणै मुंह चोल़ी करै धरनीं। 15 सामरी नगरीए ज़ेठै-शाल़्है रहणें मैहल अर हिंऊंदै रहणें मैहल पाणै मुंह ढोल़ी। तिन्नें हाथी दांदे किम्मती च़िज़ा करै सज़ाऊऐ दै मैहल अर बडै शोभलै मैहल पाणै मुंह सोभ ढोल़ी। अह गल्ल डाही मंऐं बिधाता बोली।"