11 जब मैं यरूसलेम गौ, तौ मैं हुँआँ तीन दिन रुको। 12 मैं कोईये कै नाय बताओ कि परमेस्वर मोकै यरूसलेम के ताहीं का करन ताहीं प्रेरित करी है। फिर आधी रात कै मैं उठो और अपने संग कुछ लोगन कै लैकै बाहर चले गौ। और मैं कोई कै कछु ना बताओ, मैं जो जानवर के ऊपर बैठो रहौ, बाकै छोड़कै मेरे संग कोई जानवर ना रहै। 13 मैं रात कै तराई के फाटक से हुईकै निकरो और अजगर के सोता के घाँईं, और कूड़ा-फाटक के झोने गौ, और यरूसलेम की टूटी भई दीबार और जले फाटकन कै देखो। 14 तौ मैं अग्गु बढ़कै सोता के फाटक और राजा के कुंड के झोने गौ; पर मेरी सवारी के जानवर के ताहीं अग्गु जान की जघा ना रहै। 15 तौ मैं रातै रात घाटी से हुईकै दीबार कै देखत भई चढ़ गौ; फिर घूमकै तराई के फाटक से भीतर आओ, और ऐसे करकै सहर के घाँईं लौटियाओ।
16 और अधिकारी नाय जानत रहैं, कि मैं कहाँ गौ, और का करत रहौं; और मैं तौले ना तौ यहूदियन कै और ना पुजारिन और नेता ना अधिकारी और ना दुसरे काम करन बारेन लोगन कै बताओ।