1 बीस साल के बाद नीसान महेना मै, जब राजा अर्तछत्र खानु खात होथै, तौ मैं बाके झोने दाखरस लैकै गौ। जासे पहले बौ मोकै दुखी कहुए नाय देखी रहै, 2 राजा तभई मोसे पूँछी, "तेरो चैहरा इतनो दुखी काहे कै है? तू बिमार तौ न दिखथै, लगथै जरूर तेरो मन उदास है।" तौ मैं डराए गौ।
3 और मैं बाके सबाल को जबाब दौ, "महामहिम सदा अमर रहबै! मैं दुखी काहे न होमौं, जब बौ सहर जहाँ मेरे पुरखन कै दफनाओ गौ है, बौ जघा तौ खंडर ही चुको है और बाके मोहोट आगी से नास ही गै हैं, तौ मेरो चैहरा काहे उदास ना रहबै?"
4 राजा मोसे पूँछी, "तू का चाहथै?" तौ मैं स्वर्ग के परमेस्वर से प्रार्थना करो,
5 और फिर मैं राजा से कहो, "अगर महामहिम अपने दास के ऊपर मैहरबान है, और मेरी बिनती कै सुनथै, तौ मोकै यहूदा देस मै, बौ सहर मै जान की इजाजत दे जहाँ मेरे पुरखन कै दफनाओ गौ है, ताकी मैं सहर कै दुबारा बनाए सकौं।"
6 तौ राजा जोके झोने रानी भी बैठी रहै, मोसे पूँछी, "तैं कितने दिन ले यात्रा मैं रहगो? और कब लौटैगो?" मैं बाकै एक सई समय बताओ, तौ राजा मोकै खुसी से भेजन ताहीं सहमत हुई गौ।
7 फिर मैं राजा से बिनती करो, अगर राजा कै सई लगै, तौ फरात नदिया के पछार दिसा के देस के सब अधिपतियन कै चिट्ठी देन की किरपा कर, कि जब ले मैं यहूदा कै ना पहुँचौं, तौले बे मोकै अपने-अपने देस मैं से हुईकै जान देमैं। 8 और का मैं राजभवन के रखबरिया आसाप के नाओं एक चिट्ठी लिख सकथौं, कि बौ मोकै भवन के झोने गढ़ के फाटकन, और नगर की दीवार, और मेरे के लिरहन के ताहीं, जे कड़ियाँ बनान के ताहीं कठिया देबै? और काहैकि मेरे परमेस्वर को अनुग्रहकारी हात मेरे ऊपर रहै, राजा मेरी विनती स्वीकार कर लई।
9 तौ मैं फरात नदिया के पार के अधिपतियन के झोने जाएकै, उन्हैं राजा की चिट्ठी दौ। राजा मेरे संग सेनापति और घुड़सवार भी भेजी रहै।
10 जौ सुनकै कि एक लोग इस्राएलियन के भलाई ताहीं तरकीब बतान कै आओ है, होरोनी सम्बल्लत और तोबियाह नाओं को कर्मचारी जो अम्मोनी रहै, बे दोनों कै बड़ा बुरो लगो।
11 जब मैं यरूसलेम गौ, तौ मैं हुँआँ तीन दिन रुको। 12 मैं कोईये कै नाय बताओ कि परमेस्वर मोकै यरूसलेम के ताहीं का करन ताहीं प्रेरित करी है। फिर आधी रात कै मैं उठो और अपने संग कुछ लोगन कै लैकै बाहर चले गौ। और मैं कोई कै कछु ना बताओ, मैं जो जानवर के ऊपर बैठो रहौ, बाकै छोड़कै मेरे संग कोई जानवर ना रहै। 13 मैं रात कै तराई के फाटक से हुईकै निकरो और अजगर के सोता के घाँईं, और कूड़ा-फाटक के झोने गौ, और यरूसलेम की टूटी भई दीबार और जले फाटकन कै देखो। 14 तौ मैं अग्गु बढ़कै सोता के फाटक और राजा के कुंड के झोने गौ; पर मेरी सवारी के जानवर के ताहीं अग्गु जान की जघा ना रहै। 15 तौ मैं रातै रात घाटी से हुईकै दीबार कै देखत भई चढ़ गौ; फिर घूमकै तराई के फाटक से भीतर आओ, और ऐसे करकै सहर के घाँईं लौटियाओ।
16 और अधिकारी नाय जानत रहैं, कि मैं कहाँ गौ, और का करत रहौं; और मैं तौले ना तौ यहूदियन कै और ना पुजारिन और नेता ना अधिकारी और ना दुसरे काम करन बारेन लोगन कै बताओ। 17 तौ मैं उनसे कहो, "तुम तौ खुद देखथौ, कि हम कैसी हालत मैं हैं, कि यरूसलेम उजाड़ पड़ो है और बाके फाटक जले भै हैं। तौ आबौ, हम यरूसलेम की दीबार कै बनामैं, कि आन बारे समय मैं हमरी नाओंधराई ना रहबै।" 18 फिर मैं उनकै बताओ, कि मेरे परमेस्वर की किरपा दृस्टि मेरे ऊपर कैसी भई, और राजा मोसे का-का बात कही रहै। तौ बे कहीं, "आबौ हम कमर बाँधकै बनान लगैं।" और बे जौ भले काम कै करन के ताहीं हियाब भाँद लईं।
19 जौ सुनकै होरोनी सम्बल्लत और तोबियाह नाओं को कर्मचारी जो अम्मोनी रहै, और गेसेम नाओं को एक अरबी, हमरी मजाक उड़ान लगे; "जौ तुम का काम करथौ। का तुम राजा के बिरोध मैं बगावत करैगे?"
20 तौ मैं उनकै जबाब दैकै उनसे कहो, "स्वर्ग को परमेस्वर हमरो काम सफल करैगो, हम बाके दास हैं, और हम एक बार और दीबार कै बनान को काम सुरू करंगे।" लेकिन यरूसलेम मै न बनो रहने को और बामै कोई अधिकार न है।