मुसीबत में भरोसा
1 दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : दूर-दराज़ जज़ीरों का कबूतर। यह सुनहरा गीत उस वक़्त से मुताल्लिक़ है जब फ़िलिस्तियों ने उसे जात में पकड़ लिया।
ऐ अल्लाह, मुझ पर मेहरबानी कर! क्योंकि लोग मुझे तंग कर रहे हैं, लड़नेवाला दिन-भर मुझे सता रहा है।
3 लेकिन जब ख़ौफ़ मुझे अपनी गिरिफ़्त में ले ले तो मैं तुझ पर ही भरोसा रखता हूँ।
4 अल्लाह के कलाम पर मेरा फ़ख़र है, अल्लाह पर मेरा भरोसा है। मैं डरूँगा नहीं, क्योंकि फ़ानी इनसान मुझे क्या नुक़सान पहुँचा सकता है?
8 जितने भी दिन मैं बेघर फिरा हूँ उनका तूने पूरा हिसाब रखा है। ऐ अल्लाह, मेरे आँसू अपने मशकीज़े में डाल ले! क्या वह पहले से तेरी किताब में क़लमबंद नहीं हैं? ज़रूर!
11 अल्लाह पर मेरा भरोसा है। मैं डरूँगा नहीं, क्योंकि फ़ानी इनसान मुझे क्या नुक़सान पहुँचा सकता है?