एलीशा के च्यार अदभुदकाम
1 नबियाँ के दल म्ह तै एक की जनान्नी नै एलीशा की दुहाई देकै कह्या, "तेरा दास मेरा पति मर ग्या, अर तू जाणै सै के वो यहोवा का भय मानण आळा था, अर जिसका वो कर्जदार था, वो आया सै के मेरे दोन्नु बेट्यां नै अपणा गुलाम बणाण कै खात्तर ले जावै।" 2 एलीशा नै उसतै पूच्छया, "मै तेरै खात्तर के करुँ? मन्नै बता के तेरे घर म्ह के सै?" उसनै उत्तर दिया, "तेरी दास्सी कै घर म्ह एक हाण्डी तेल नै छोड़ और किमे न्ही सै।" 3 उसनै कह्या, "तू बाहर जाकै अपणे सारे पड़ोसियाँ तै खाल्ली बरतन माँग ले आ, अर थोड़े बरतन न्ही ल्याणा। 4 फेर तू अपणे बेट्यां समेत अपणे घर म्ह जा, अर द्वार बन्द करकै उन सारे बरतनां म्ह तेल उण्डेल देणा, अर जो भर जावै उसनै न्यारे धरिये।" 5 फेर वो उसकै धोरै तै चली गई, अर अपणे बेट्यां समेत अपणे घर जाकै किवाड़ बन्द करे; फेर वे तो उसकै धोरै बरतन ल्यान्दे गए अर वो पान्दी गई। 6 जिब बरतन भरगे, फेर उसनै अपणे बेट्टे तै कह्या, "मेरै धोरै एक और भी ले आओ;" उसनै उसतै कह्या, "और बरतन तो न्ही रहे।" फेर तेल रुक ग्या। 7 फेर उसनै जाकै परमेसवर के भगत तै यो बता दिया। अर उसनै कह्या, "जा तेल बेचकै कर्ज भर दे; अर जो रह जावै, उसतै तू अपणे बेट्यां समेत अपणा गुजारा करिये।"