शिमी का श्राप
5 जिब दाऊद राजा बहूरीम नगर तक पोहच्या, फेर शाऊल का एक कुटुम्बी ओड़ै तै लिकड़या, वो गेरा का बेट्टा शिमी था; अर वो कोसदा होया चल्या आया। 7 शिमी कोसदा होया या बकदा गया, "दूर हो खून्नी, दूर हो ओच्छे, लिकड़ज्या, लिकड़ज्या!
10 राजा नै कह्या, "सरूयाह के बेट्यो, यो मेरा या थारा काम कोनी? वो जो कोसै सै, अर यहोवा नै जो उसतै कह्या सै, के दाऊद नै श्राप दे, तो उसतै कौण पूछ सकै सै, के तन्नै इसा क्यूँ करया?" 11 फेर दाऊद नै अबीशै अर अपणे सारे कर्मचारियाँ तै कह्या, "जिब मेरा अपणा बेट्टा ए मेरी जान का दुश्मन सै, तो यो बिन्यामीनी इब इसा क्यूँ ना करै? उसनै रहण द्यो, अर श्राप देण द्यो; क्यूँके यहोवा नै उसतै कह्या होवैगा। 12 कदे भी यहोवा इस उपद्रव पै, जो मेरे पै हो रह्या सै, नजर करकै आज के श्राप के बदलै मेरे ताहीं भला बदला दे।"